5 करोड़ की सीसी रोड बनी ‘भूतिया रास्ता’! पिड़ताली इंडस्ट्रियल पार्क में 6 साल से ठप विकास, एक भी फैक्ट्री नहीं
एमपीआईडीसी की योजनाएं कागजों में दफन—करोड़ों खर्च के बाद भी सूनी पड़ी इंडस्ट्रियल जमीन, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क सिंगरौली
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सिंगरौली जिले के पिड़ताली इंडस्ट्रियल पार्क का हाल (The State of Pidtali Industrial Park) अब सरकारी योजनाओं (Government Schemes) की हकीकत बयां कर रहा है। करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई सीसी रोड आज वीरान पड़ी (The concrete road lies deserted today.) है, जहां न उद्योग लगे, न रोजगार आया—सिर्फ सरकारी पैसे का ‘कंक्रीट’ जमीन पर बिछा दिख (Only government funds appear to have been laid out on the ground—in the form of ‘concrete’.) रहा है।
एमपीआईडीसी (MPIDC) द्वारा बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि इस इंडस्ट्रियल पार्क में स्थानीय युवाओं को रोजगार (Employment for Local Youth in the Industrial Park) मिलेगा और उद्योगों की स्थापना (Establishment of Industries) होगी। लेकिन हकीकत यह है कि 6 साल बीत जाने के बाद भी विकास की फाइलें दफ्तरों में धूल खा (Development files are gathering dust in offices.) रही हैं।
जानकारी के अनुसार, 92 हेक्टेयर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की योजना (Plan to develop an industrial park in the region.) बनी थी, जिसमें सड़क (road) , पानी और बिजली जैसी सुविधाओं (Facilities such as electricity) के लिए करोड़ों खर्च किए गए। यहां तक कि 2 किलोमीटर लंबी सीसी रोड भी बनाई गई, ताकि उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी (Improved Connectivity for Industries) मिल सके। लेकिन आज तक इस सड़क से एक भी उद्योग (Not a single industry from the road) नहीं जुड़ा—नतीजा, पूरी सड़क सुनसान (The road is deserted.) और बेकार साबित (Proved useless) हो रही है।
स्थानीय लोगों (Local people) का कहना है कि पहले यहां गतिविधियां तेज (Activities Intensify) थीं, जमीन आवंटन भी हुआ, लेकिन अचानक सब कुछ ठप पड़ गया। अब न कोई नया निवेश (New Investment) आ रहा है, न प्रशासन की कोई ठोस पहल (A Concrete Initiative by the Administration) दिख रही है।
बड़े सवाल:
5 करोड़ की सड़क का फायदा किसे मिला?
6 साल में एक भी उद्योग क्यों नहीं लग सका?
क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर कोई बड़ा खेल?
करोड़ों की लागत के बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं?







