526 करोड़ की कमाई के बाद भी 3 समूह घाटे में क्यों? शराब नीलामी का पूरा गणित क्या है!

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Sunday, March 29, 2026 11:36 AM

526 करोड़ की कमाई के बाद भी 3 समूह घाटे में क्यों? शराब नीलामी का पूरा गणित क्या है?

REWA NEWS:   आबकारी विभाग (Excise Department) ने आखिरकार 17 शराब ग्रुप्स को बेच (Sold to 17 liquor groups) दिया। इन ग्रुप्स ने रिजर्व प्राइस (The groups set the reserve price.) पर बेचकर करीब 526 करोड़ रुपये कमाए हैं। इनमें से 14 ग्रुप्स की नीलामी रिजर्व प्राइस (Reserve Price for the Auction of 14 Groups) से ज्यादा पर हुई। आखिरी तीन ग्रुप्स को नुकसान (Harm to Groups) हुआ। बोली रिजर्व प्राइस (Bid Reserve Price)  से कम थी, जिसे विभाग ने मान लिया। सरकार की कमाई (Government Revenue) यहीं नहीं रुकी है। यह कमाई सिर्फ दुकानों को शराब बेचकर (By selling liquor to shops) हुई है। आबकारी विभाग ठेकेदारों से भी दुकानों में शराब (The Excise Department is also sourcing liquor for the shops from contractors.) रखने और बेचने का चार्ज (Selling Charge) लेगा। कुल मिलाकर इस साल रीवा और मऊगंज में शराब का कारोबार 1,000 करोड़ रुपये को पार कर जाएगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सरकार (Government) ने इस बार फिर से शराब की दुकानों को ऑक्शन (Auction of Liquor Shops) करने का फैसला किया था। इसके लिए नई एक्साइज पॉलिसी (New Excise Policy) बनाई गई थी। इसी पॉलिसी के तहत सभी जिलों में नए शराब ग्रुप (New Liquor Groups) बनाए गए और ग्रुप की रिज़र्व प्राइसिंग (Group Reserve Pricing) की गई। इतना ही नहीं, फाइनेंशियल ईयर (Financial Year)  2025-26 के लिए रिज़र्व प्राइस में 20 परसेंट की बढ़ोतरी करके ग्रुप की नीलामी करने का फैसला (Decision to Auction the Group)  किया गया। इस नई पॉलिसी (New Policy) के मुताबिक, रीवा में शराब ग्रुप की नीलामी (Auction of Liquor Groups in Rewa) शुरू हुई। पहले फेज में तीन स्टेप शामिल थे। इन तीन फेज में सभी ग्रुप को ई टेंडर लो एक्सॉन में रखा गया। पहले फेज में 8 ग्रुप बिके। बाकी 9 ग्रुप को फिर दूसरे फेज में रखा गया। आखिरी 2 ग्रुप शुक्रवार को एक्सॉन में लैंड हुए। उन्हें कॉन्ट्रैक्टर भी मिल गए। हालांकि, रिज़र्व प्राइस (Reserve Price) से कम पर बोली लगाई गई। अब, फाइनल अप्रूवल (Final Approval) के लिए डिस्ट्रिक्ट एक्साइज ऑफिस से हेड ऑफिस भेजा (Sent from the District Excise Office to the Head Office.) गया है। इसे अप्रूवल मिलना लगभग तय है। हरी झंडी मिलते ही दुकान कॉन्ट्रैक्टर को हैंडओवर (Shop Handed Over to Contractor Upon Receiving the Green Signal) कर दी जाएगी। इसके बाद 1 अप्रैल से शराब की दुकानें (Liquor Shops) फिर से कॉन्ट्रैक्टर (Contractor) चलाएंगे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तीन दुकानों के लिए रिज़र्व प्राइस से कम बोली लगी

शराब दुकान ग्रुप (Liquor Shop Group) के लिए 14 कॉन्ट्रैक्टर मिल गए। इन ग्रुप्स को लेने के लिए कॉन्ट्रैक्टर्स ने रिज़र्व प्राइस से ज़्यादा (The contractors bid higher than the reserve price.) की बिड लगाईं। डिपार्टमेंट ने उन्हें भी मान लिया और ग्रुप्स कॉन्ट्रैक्टर्स को ट्रांसफर (Transfer to Group Contractors) कर दिए। पिछले तीन ग्रुप्स के लिए कॉन्ट्रैक्टर्स ने कम रेट कोट किए। इसकी शुरुआत बैकुंठपुर से हुई। 30.48 करोड़ रिज़र्व प्राइस था लेकिन कॉन्ट्रैक्टर ने सिर्फ़ 29.27 करोड़ रुपये की बिड लगाई। हालांकि, डिपार्टमेंट ने इसे मान लिया। इसी तरह, शुक्रवार को डभौरा और हनुमान के लिए भी बिडिंग हुई। कॉन्ट्रैक्टर ने भी रिज़र्व प्राइस से कम की बिड लगाई। बिडिंग खत्म (Bidding Closed) हो गई है। अप्रूवल के लिए हेड ऑफिस भेजा गया है। कॉन्ट्रैक्ट फाइनल (Contract Finalized) होने की उम्मीद है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सरकार की कमाई अभी खत्म नहीं हुई है

सरकार ने शराब ग्रुप्स की नीलामी (The government auctioned off liquor groups.) करके सिर्फ़ लाइसेंस फीस और ड्यूटी वसूली है। इन शराब दुकानों (Liquor shops) में बिकने वाली शराब भी कॉन्ट्रैक्टर (The Liquor Contractor, Too) को बेचकर पैसे कमाएगी। कॉन्ट्रैक्टर वेयरहाउस से शराब (Liquor from the Contractor’s Warehouse) उठाएगा। रकम भी सरकार के अकाउंट में जमा (The amount has also been deposited into the government’s account.) होगी। इस बार रीवा का शराब का कारोबार (Rewa’s Liquor Business) और सरकारी रेवेन्यू (Government Revenue) 1,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर जाएगा।

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