US-इज़राइल और ईरान युद्ध की वजह से भारत में LPG संकट 2026 यह है लॉकडाउन की पुकार, युद्ध की वजह से भारत में LPG संकट

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Tuesday, March 31, 2026 6:09 AM

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US-इज़राइल और ईरान युद्ध की वजह से भारत में LPG संकट 2026 यह है लॉकडाउन की पुकार, युद्ध की वजह से भारत में LPG संकट,  रेलवे स्टेशनों पर मज़दूरों की भीड़, मुंबई से गुजरात तक हर जगह एक जैसा नज़ारा, देश की आर्थिक राजधानी पर क्या असर पड़ रहा है?

LPG संकट:   US-इज़राइल और ईरान युद्ध के कारण भारत (India Due to War) में LPG संकट गहराता (LPG Crisis Deepens) जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद (Strait of Hormuz Closed) होने के कारण खाड़ी देशों से भारत में गैसोलीन (Gasoline from Gulf Countries to India) और तेल की सप्लाई नहीं (No oil supply) हो पा रही है। LPG संकट ने इंडस्ट्री (The LPG crisis has hit the industry.) से लेकर आम ज़िंदगी तक सबको हिलाकर रख दिया है। LPG सप्लाई न होने के कारण फैक्ट्रियां बंद (Factories shut down due to lack of LPG supply.) हो रही हैं। इसके कारण मज़दूरों का पलायन शुरू हो गया है। रेलवे स्टेशनों (Railway stations) पर मज़दूरों की भीड़ जमा हो गई है। मुंबई से गुजरात तक, हर जगह यही नज़ारा देखने को मिल रहा है। ऐसा ही नज़ारा कोरोना काल में लगे लॉकडाउन (A Glimpse of the Lockdown During the COVID-19 Era) के दौरान भी देखने को मिला था। COVID काल में भी इंडस्ट्री बंद (Industry Shut Down) होने के कारण UP, बिहार और बंगाल से मज़दूर अपने घरों को चले गए थे। वही नज़ारा फिर से देखकर लोग अंदाज़ा लगा रहे हैं कि यह लॉकडाउन की आहट (The Looming Lockdown) तो नहीं है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

देश की आर्थिक राजधानी कराह रही है

भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई के किचन (The Kitchens of Mumbai, India’s Economic Capital) पर भी असर पड़ा है। मुंबई में लोग राशन के लिए नहीं, बल्कि कई सिलेंडर के लिए लाइनों में खड़े (Standing in lines for cylinders) हैं। इस संकट का फायदा उठाने वाले ब्लैक मार्केटर भी एक्टिव (Black Marketers Are Also Active) हो गए हैं। आम लोगों का आरोप है कि जो सिलेंडर पहले 900-1000 रुपये का मिलता था, उसके लिए अब 2500 से 3000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

लोकमान्य तिलक टर्मिनस (Lokmanya Tilak Terminus) (LTT) पर इन दिनों भीड़ छुट्टियों (Crowded Holiday Days) की नहीं, बल्कि ‘मजबूरन पलायन’ (Forced Migration) की है। स्टेशन पर बोरिया-बिस्तर लेकर खड़े लोगों (People standing at the station with their belongings) का कहना है कि सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं और बाहर का खाना इतना महंगा हो गया है कि दिन भर की पूरी कमाई पेट भरने में ही खर्च हो जाती है। भूखे मरने से अच्छा है कि अपने गांव लौट जाएं। पलायन कर रहे लोगों (People fleeing) का मानना ​​है कि गांव में कम से कम जलाने की लकड़ी, लकड़ी और खेत तो हैं जहां वे गुज़ारा कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि अगर इंटरनेशनल तनाव कम (International tensions ease.) नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में फ्यूल की कमी और बढ़ सकती है। इस बात को लेकर आम जनता में गहरा गुस्सा है। लोगों की सरकार से बस एक ही मांग है- “दुनिया के किसी भी कोने में जंग (War in any corner of the world) नहीं बुझनी चाहिए, हमारे घर का चूल्हा नहीं बुझना चाहिए। सरकार को इस ब्लैक मार्केट (The government needs to address this black market.) को रोकने और दूसरी सप्लाई पक्का करने के लिए युद्धस्तर (On a War Footing to Ensure Supply) पर काम करने की ज़रूरत है।

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