BREAKING NEWS: भारतीय रुपया में अब तक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक गिरावट, 95.20 प्रति डॉलर पहुंचा, तेल संकट और ग्लोबल तनाव से बढ़ी मुश्किलें
BREAKING NEWS: ग्लोबल मार्केट (Global Market) में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों (Soaring crude oil prices) और वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव (Rising Tensions in West Asia) के बीच गुरुवार को भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट (Historic Decline in the Indian Rupee) आई। फॉरेन एक्सचेंज मार्केट (Foreign Exchange Market) में रुपया 32 पैसे गिरकर 95.20 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया। मार्केट खुलने पर रुपया 95.01 पर था, लेकिन डॉलर की बढ़ती डिमांड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से इसमें तेज गिरावट आई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मजबूत होते डॉलर इंडेक्स (The Strengthening Dollar Index) और इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (International Benchmark Brent Crude) के $122 प्रति बैरल के करीब पहुंचने से भारतीय करेंसी पर दबाव बर्दाश्त (Indian Currency Withstands Pressure) से बाहर हो गया है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स (Finrex Treasury Advisors) के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रुपये की इस बुरी हालत की मुख्य वजह खाड़ी देशों में चल रहा तनाव (The main reason is the ongoing tension in the Gulf countries.) है। होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा जहाजों की नाकाबंदी (Blockade of ships) और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका की नाकाबंदी से तेल सप्लाई (Oil Supply Amidst the US Blockade) में रुकावट का डर गहरा गया है। भारत अपनी तेल ज़रूरतों (India’s oil requirements) का एक बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करता है, देश का फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व तेज़ी से घट (Foreign exchange reserves dwindled rapidly) रहा है और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों की वजह से इम्पोर्ट 9Imports due to rising oil prices) पर खर्च बढ़ रहा है। इस जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता ने इन्वेस्टर्स को डरा दिया है, जिससे वे डोमेस्टिक मार्केट से पैसा (Money from the domestic market) निकालकर सुरक्षित इन्वेस्टमेंट (Safe Investment) की ओर भाग रहे हैं।
रुपये की गिरावट का सीधा असर डोमेस्टिक स्टॉक मार्केट (Impact on the Domestic Stock Market) पर भी पड़ा। शुरुआती ट्रेड में सेंसेक्स 821 पॉइंट्स टूटकर 76,674 पर आ गया, जबकि निफ्टी भी करीब 287 पॉइंट्स की गिरावट के साथ 24,000 के साइकोलॉजिकल लेवल (Psychological Level) से नीचे चला गया। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Foreign Institutional Investors) (FIIs) ने अकेले बुधवार को 2,468 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे, जिससे मार्केट में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। रुपया, जो 1947 में डॉलर के बराबर था, आज अपने सबसे कमज़ोर दौर से गुज़र रहा है, जिससे मिडिल क्लास के लिए महंगाई (Inflation for the Middle Class) और विदेश यात्रा और महंगी हो जाएगी।







