BREAKING NEWS: ग्लोबल तेल पॉलिटिक्स में बड़ा उलटफेर: UAE ने OPEC से 60 साल पुराना रिश्ता तोड़ा, तेल प्रोडक्शन पर लगी रोक हटाने से भारत समेत दुनिया को सस्ता पेट्रोल और डीज़ल मिल सकता है

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Friday, May 1, 2026 8:15 AM

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BREAKING NEWS: ग्लोबल तेल पॉलिटिक्स में बड़ा उलटफेर: UAE ने OPEC से 60 साल पुराना रिश्ता तोड़ा, तेल प्रोडक्शन पर लगी रोक हटाने से भारत समेत दुनिया को सस्ता पेट्रोल और डीज़ल मिल सकता है

BREAKING NEWS:   यूनाइटेड अरब अमीरात (United Arab Emirates) (UAE) ने ताकतवर ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज़ (The Powerful Organization of Petroleum Exporting Countries) (OPEC) को अलविदा कहकर ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल मचा (Causing a stir in the global energy market) दी है। 1 मई, 2026 से लागू हुए इस फैसले के साथ, UAE अब तेल प्रोडक्शन के लिए OPEC (OPEC for Oil Production) के सख्त कोटा सिस्टम से आज़ाद (Freedom from the rigid quota system) हो गया है। UAE के एनर्जी मिनिस्टर सुहैल अल मज़रूई ने साफ (UAE Energy Minister Suhail Al Mazrouei clarified) किया कि ऑर्गनाइज़ेशन से अलग होने के बाद देश के पास मार्केट की डिमांड (After separating from the organization, the country has market demand) के हिसाब से अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी (Production Capacity) और सप्लाई बढ़ाने की ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी (Greater flexibility to increase supply) होगी। UAE के इस कदम को ईरान युद्ध से ग्लोबल इकोनॉमी में आए संकट (Greater flexibility to increase supply) के बीच उसकी लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक स्ट्रैटेजी का हिस्सा (Part of a Long-Term Economic Strategy) माना जा रहा है।

 

 

 

 

 

 

 

OPEC छोड़ने के बाद, UAE अब अपनी कैपेसिटी (Capacity) से हर दिन 4.5 मिलियन बैरल से ज़्यादा तेल प्रोड्यूस (Capacity) कर पाएगा, जो OPEC द्वारा तय 3.4 मिलियन बैरल के कोटे से काफी ज़्यादा है। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि जब UAE की ज़्यादा सप्लाई ग्लोबल मार्केट (supply global market) में पहुंचेगी, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव पड़ेगा और ग्लोबल बेंचमार्क (Global Benchmark)  ‘ब्रेंट क्रूड’ के रेट गिर सकते हैं। हालांकि, मौजूदा जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) और शिपिंग रूट्स में आने वाली रुकावटों (Obstacles in shipping routes)  की वजह से प्रोडक्शन बढ़ाने का पूरा फायदा (The Full Benefit of Increasing Production) मिलने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं, लेकिन यह फैसला OPEC की मोनोपॉली के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

 

 

 

 

 

 

 

भारत जैसे बड़े तेल इंपोर्टर (Major oil importers like India) के लिए UAE का यह फैसला बहुत बड़ी राहत साबित हो सकता है। भारत अपनी तेल ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा (India meets a large portion of its oil requirements) UAE से इंपोर्ट करता है। OPEC की पाबंदियों से आज़ाद, अगर UAE ज़्यादा प्रोडक्शन (UAE: Higher Production) और एक्सपोर्ट करता है, तो भारत को न सिर्फ़ काफ़ी क्वांटिटी (UAE: Higher Production)  मिलेगी, बल्कि कॉम्पिटिटिव कीमतों की वजह से घरेलू लेवल पर पेट्रोल (Petrol at the domestic level due to competitive prices) और डीज़ल की कीमतें कम होने की संभावना (Diesel prices likely to decrease.) भी बढ़ेगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump)  भी UAE के इस कदम से खुश हैं, क्योंकि इससे तेल की कीमतों को कंट्रोल (Controlling Oil Prices) करने में OPEC का दबदबा कमज़ोर (OPEC’s Dominance Weakens) होगा और मार्केट में कॉम्पिटिशन (Competition in the market)  बढ़ेगा।

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