Singrauli Breaking News:  ऊर्जा राजधानी सिंगरौली की दर्दनाक तस्वीर क्यों? विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जल संकट से जूझ रहे आदिवासी परिवार, एक ही गड्ढे का पानी पीने को मजबूर इंसान और जानवर

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Singrauli Breaking News:  ऊर्जा राजधानी सिंगरौली की दर्दनाक तस्वीर क्यों? विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जल संकट से जूझ रहे आदिवासी परिवार, एक ही गड्ढे का पानी पीने को मजबूर इंसान और जानवर

नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क सिंगरौली
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अवनीश तिवारी

Singrauli Breaking News:  मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला देश की एनर्जी कैपिटल (Singrauli district of Madhya Pradesh is the energy capital of the country.) के तौर पर जाना जाता है। डेवलपमेंट (development) के कई बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन दूसरी और एनर्जी कैपिटल सिंगरौली के एक गांव की तस्वीर आपको सोचने (The picture of a village in the energy capital Singrauli will make you think.) पर मजबूर कर देगी। सिंगरौली के एक गांव में सैकड़ों से ज़्यादा परिवार (More than hundreds of families in a village in Singrauli) ऐसे हैं जो पीने के लिए कुएं का पानी इस्तेमाल करते हैं और इस भीषण गर्मी में कुआं ही उनका एकमात्र सहारा (The well is their only refuge in this scorching heat.) है।

 

 

 

गड्ढे से पानी पीते गांववाले और जानवर
इस गांव के लोगों के लिए सबसे बड़ी अजीब बात यह है कि एक तरफ गांववाले गड्ढे का पानी (The most strange thing is that on one side the villagers dug a pit.)  पीते हैं और दूसरी तरफ जानवर भी उसी गड्ढे का पानी पी रहे हैं। दिक्कत यह है कि इस भीषण गर्मी में लोगों को अपने और अपने परिवार के लिए पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

असल में, पूरा मामला सिंगरौली ज़िले के खैराही गांव का है। एक आदिवासी मोहल्ले में जहां इस भीषण गर्मी में पानी की इतनी कमी (In a tribal locality where there is such a shortage of water in this scorching heat) है कि लोग चिलचिलाती गर्मी में अपने घरों से निकलकर गड्ढों में लीकेज से पानी भरते हैं और गड्ढों का पानी ही उनके लिए इस भीषण गर्मी में ज़िंदा रहने का एकमात्र सहारा (The only way to survive in the scorching heat) है।

 

 

 

 

100 से ज़्यादा परिवार पानी के लिए तरस रहे हैं
खैराही गांव के स्थानीय निवासी ललन सिंह कहते हैं, “जब से हमें इस नदी के बारे में पता चला है, हम इसी नदी का पानी पी रहे हैं। यहां कोई दूसरा ज़रिया नहीं है। नदी के किनारे 100 से ज़्यादा परिवार रहते हैं जो नदी के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं। सबसे दर्दनाक तस्वीर तब सामने आती है जब एक और इंसान तो दूसरी तरफ जानवर नदी के उन्हीं गड्ढों का पानी पीने को मजबूर हैं। गांव के बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को इस गर्मी में पीने के पानी के लिए सबसे ज़्यादा परेशानी (Pregnant women face the most difficulty in getting drinking water this summer.) होती है,” उन्होंने कहा। गांव के सरपंच मुश्ताक अहमद कहते हैं, “अधिकारियों को इस भयानक समस्या से कई बार अवगत कराया (The authorities have been informed about this serious problem several times.)  जा चुका है। लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं (no permanent solution)  निकला है। खैराही गांव की नदी के किनारे बसी इस आदिवासी बस्ती में पानी की बहुत समस्या है। पानी की समस्या को दूर करने के लिए कई बार विधायक से बजट मांगा (Asked for budget from MLA several times to solve the water problem) गया है, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिला है। सर्वे भी हुआ है, लेकिन समस्या जस की तस है।

 

 

विधायक बोले- पानी की समस्या न के बराबर
नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क सिंगरौली से बात करते हुए देवसर विधायक राजेंद्र मेश्राम ने कहा, “इलाके में इस तरह की पानी की समस्या लगभग नहीं है और इस भीषण गर्मी (extreme heat) में अगर ऐसा कुछ है तो लोगों को तुरंत राहत दी जाएगी और जितना हो सकेगा उनके लिए पीने का पानी उपलब्ध (drinking water available) कराया जाएगा। हालांकि, नल जल योजना के तहत काम तेजी से चल (Work is progressing rapidly under the tap water scheme.) रहा है और लगभग पूरे जिले में पानी की कोई कमी नहीं है। अगर कोई इससे वंचित है या उसे कोई समस्या है तो स्थानीय विधायक (If there is any problem then the local MLA) और इसके लिए सेवक होने के नाते मैं खुद आगे आकर इसकी व्यवस्था करूंगा।”

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