Singrauli breaking news: कम दिनों की बची नौकरी, अब आरोपों के घेरे में रण बहादुर! जमीन खरीदी, लेकिन विक्रेता को नहीं मिला पूरा पैसा?
नई ताकत न्यूज नेटवर्क
Singrauli breaking news: नगर निगम सिंगरौली में पदस्थ मोरवा राजस्व निरीक्षक (Morwa Revenue Inspector posted in Municipal Corporation Singrauli) रण बहादुर सिंह के खिलाफ एक गंभीर शिकायत सामने (A serious complaint has been filed against) आई है। ग्राम बडेशर, पोस्ट खड़ी निवासी दिनेश कुमार गौतम ने नगर निगम आयुक्त सविता प्रधान को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप (allegations by submitting a written complaint) लगाया है कि पारिवारिक रिश्ते और भरोसे का फायदा उठाकर उनकी जमीन खरीदी (Taking advantage of family relationships and trust, he bought their land.) गई, लेकिन आज तक पूरी रकम का भुगतान नहीं किया गया।
शिकायत के अनुसार, रण बहादुर सिंह और फरियादी एक ही क्षेत्र के निवासी होने के साथ पारिवारिक संबंध (Family relationship with the complainant being a resident of the same area) रखते हैं। वर्ष 2019-20 में इसी भरोसे के आधार पर जमीन का सौदा (Land deals based on trust) हुआ। आरोप है कि शुरुआत में कुछ राशि देने के बाद बाकी भुगतान “कुछ दिनों में देने” का आश्वासन दिया गया, लेकिन समय बीतने के बाद भी बकाया रकम नहीं दी गई।
फरियादी का कहना है कि जब आर्थिक जरूरत (The complainant says that when there is financial need) के चलते उसने अपना पैसा मांगा, तो भुगतान करने के बजाय उसे टालमटोल, दबाव और कथित धमकियों का सामना (facing alleged threats) करना पड़ा। शिकायत में आरोप (allegations in complaint) लगाया गया है कि रण बहादुर सिंह ने अपने पद, पहुंच और रसूख का हवाला देते हुए कहा कि “जो करना है कर लो, अब पैसा नहीं मिलेगा।”
शिकायतकर्ता (v) दिनेश कुमार गौतम ने दावा किया है कि उसने अपनी जमीन बेच दी, लेकिन उसकी पूरी कीमत आज तक नहीं मिली। कई बार निवेदन, बातचीत और समझाने की कोशिश के बाद भी समाधान नहीं निकला। इसके चलते वह आर्थिक और मानसिक परेशानी झेल (suffer mental distress) रहा है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ता ने नगर निगम कर्मचारी (The complainant had filed a complaint against the municipal corporation employee) रण बहादुर सिंह की संपत्तियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि नौकरी के दौरान उन्होंने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित (Acquired assets beyond his income) की है तथा विभिन्न रिश्तेदारों के नाम पर जमीन-जायदाद बनाई गई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी (The allegations could not be independently verified.) है।
फरियादी ने नगर निगम आयुक्त से मांग (The complainant demanded from the Municipal Corporation Commissioner) की है कि उसकी बकाया 3 लाख 50 हजार रुपये की राशि दिलाई जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि यदि भुगतान नहीं किया जाता तो संबंधित कर्मचारी के वेतन से कटौती कर राशि उपलब्ध (If the payment is not made, the amount will be made available by deducting it from the salary of the concerned employee.) कराई जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
अब सवाल यह है कि नगर निगम प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता (How seriously is the Municipal Corporation administration taking this complaint?) से लेता है। क्या आरोपों की जांच होगी? क्या फरियादी को उसकी बकाया राशि मिलेगी? और क्या एक सरकारी कर्मचारी पर लगे इन आरोपों की प्रशासनिक पड़ताल (Should an administrative inquiry be conducted into these allegations against a government employee?) होगी?







