Singrauli Breaking News: विश्व पर्यावरण दिवस पर NCL की खुली पोल, कचरे में आग लगाने के आरोपों से घिरी अमलोरी, जयंत, निगाही और दूधिचुआ परियोजनाएं

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Singrauli Breaking News: विश्व पर्यावरण दिवस पर NCL की खुली पोल, कचरे में आग लगाने के आरोपों से घिरी अमलोरी, जयंत, निगाही और दूधिचुआ परियोजनाएं

पर्यावरण बचाने के दावों के बीच अमलोरी, जयंत, निगाही और दूधिचुआ परियोजनाओं पर खुले में कचरा डंपिंग और आग लगाने के आरोप, परिषद में गूंजा प्रदूषण का मुद्दा

नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क, अवनीश तिवारी

Singrauli Breaking News:  एक ओर 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता (Environmental protection, cleanliness on World Environment Day) और हरित विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा (Big claims are being made about green development.)  रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (Northern Coalfields Limited) (NCL) की अमलोरी, जयंत, निगाही और दूधिचुआ परियोजनाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े (Serious questions raised on the functioning of Dudhichhua projects) हो रहे हैं। नगर निगम परिषद की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने आरोप (Public representatives made allegations in the Municipal Corporation Council meeting) लगाया कि इन परियोजनाओं से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के बजाय खुले क्षेत्रों में डंप (Waste from projects is dumped in open areas instead of being disposed of scientifically.) किया जा रहा है और बाद में उसमें आग लगा दी जाती है।

 

 

परिषद में उठे मुद्दे के अनुसार अमलोरी परियोजना, जयंत परियोजना, निगाही परियोजना और दूधिचुआ परियोजना के आसपास खुले में पड़े कचरे से दुर्गंध, मच्छरों (Open garbage around the Dudhichua project causes foul smell and mosquitoes.) और विभिन्न बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ (Increased risk of spreading various diseases) रहा है। वहीं कचरे में आग लगाए जाने से निकलने वाला धुआं आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण फैला (Smoke spread air pollution to surrounding residential areas) रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसका असर केवल मानव स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि पशुधन और पर्यावरण (Its impact is not only on human health but also on livestock and the environment.) पर भी पड़ रहा है।

 

बैठक के दौरान पार्षदों ने सवाल उठाया कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा (Councillors questioned the claims of spending crores of rupees in the name of cleanliness and environmental protection._)  करने वाली NCL की परियोजनाओं में यदि कचरा प्रबंधन की यह स्थिति है तो फिर पर्यावरणीय दावों का क्या अर्थ रह जाता है। जनप्रतिनिधियों का आरोप था कि जमीनी हकीकत और प्रचार-प्रसार में दिखाई जाने वाली तस्वीरों (The public representatives alleged that the ground reality and the pictures shown in the publicity) में भारी अंतर दिखाई देता है।

 

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जब पूरे देश में पर्यावरण बचाने की बातें (On the occasion of World Environment Day, when talks about saving the environment are going on across the country)  की जा रही थीं, उसी दिन नगर निगम परिषद में अमलोरी, जयंत, निगाही और दूधिचुआ परियोजनाओं से जुड़े कचरा प्रबंधन और प्रदूषण के मुद्दे ने जोर पकड़ लिया। परिषद में इस विषय को लेकर जमकर हंगामा हुआ और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा (Responsible officials sought answers)  गया।

 

पार्षदों ने मांग की कि अमलोरी, जयंत, निगाही और दूधिचुआ परियोजनाओं में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि कचरे का निस्तारण पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हो। साथ ही खुले में कचरा फेंकने और उसमें आग लगाने जैसी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की गई।

 

अब बड़ा सवाल यह है कि विश्व पर्यावरण दिवस पर उठे इन गंभीर आरोपों(These serious allegations arose on World Environment Day)  का NCL प्रबंधन क्या जवाब देता है और पर्यावरण संरक्षण के दावों को धरातल पर उतारने (Putting environmental protection claims to reality)  के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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