Breaking News: 29 जून से शुरू होगी भगवान जगन्नाथ की दिव्य लीला, जलाभिषेक के बाद 14 दिनों तक रहेंगे एकांतवास में, फिर होंगे दुर्लभ दर्शन
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Breaking News: भारत की प्राचीन सांस्कृतिक (India’s ancient cultural…) और आध्यात्मिक नगरी काशी आज भी अपनी शानदार परंपराओं (The spiritual city of Kashi still retains its glorious traditions.) , ऐतिहासिक विरासत (Historical Heritage) और शाश्वत पहचान के लिए दुनिया भर में जानी (Known worldwide for its eternal identity) जाती है।
सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति (Sanatan Dharma, Indian culture) और आध्यात्मिक चेतना का दिव्य रूप इस पवित्र नगरी (This holy city is the divine embodiment of spiritual consciousness.) के कण-कण में समाया हुआ है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के मौके पर, 29 जून को अस्सी मार्ग पर जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का दिव्य महास्नान (The Divine Grand Bath of Goddess Subhadra ) और जलाभिषेक किया जाएगा।
जलाभिषेक (Jalabhishek (Ritual bathing of the deity with water)) के बाद, भगवान जगन्नाथ बीमार होकर 14 दिन के एकांतवास पर चले जाते हैं। इस दौरान, भगवान को औषधीय काढ़ा चढ़ाया (Offered a medicinal decoction to the deity.) जाता है और भक्तों में महाप्रसाद बांटा जाता है। 14 जुलाई को, भगवान जगन्नाथ ठीक होने के बाद फिर से भक्तों को दर्शन (Lord Jagannath recovers and gives darshan to devotees again) देंगे। इस दिन का दर्शन बहुत दुर्लभ और शुभ माना जाता (The *darshan* is considered extremely rare and auspicious.) है। ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी के प्रेसिडेंट बृजेश सिंह ने बताया कि 15 जुलाई को अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर से एक भव्य डोली यात्रा निकाली (A grand palanquin procession was taken out from the Jagannath Temple in Assi.) जाएगी। 16 से 18 जुलाई तक एक भव्य रथ यात्रा मेला लगेगा। 16 जुलाई को मंगला आरती के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा रथ पर बैठकर भक्तों को दर्शन (Devi Subhadra grants darshan to devotees while seated on the chariot.) देंगे। तीनों दिन सुबह 5 बजे भगवान की भव्य और दिव्य आरती होगी। रात 8 बजे शयन आरती और रात 12 बजे आरती होगी। 18 जुलाई की रात को महाआरती के साथ रथ यात्रा मेला खत्म होगा। 19 जुलाई को भगवान जगन्नाथ फिर से अस्सी स्थित मंदिर में विराजमान (Lord Jagannath is once again enshrined in the temple at Assi.) होंगे।







