Singrauli Breaking News:  नगर निगम के अधिकारियों की “खूबसूरती” पर मेकअप करने के लिए शायद इस गड्ढे की गंदगी ही काफी होगी

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Singrauli Breaking News:  नगर निगम के अधिकारियों की “खूबसूरती” पर मेकअप करने के लिए शायद इस गड्ढे की गंदगी ही काफी होगी

नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क 
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Singrauli Breaking News:  ऊर्जा नगरी सिंगरौली (Public tax money) इन दिनों विकास नहीं, बल्कि गड्ढों और बदहाल सड़कों की पहचान बनती (…but rather became defined by potholes and dilapidated roads.)  जा रही है। शहर की सड़कों की हालत ऐसी हो चुकी (The condition of the city’s roads has become such…)  है कि यह समझना मुश्किल है कि सड़क गड्ढे में है या गड्ढा सड़क (It is hard to tell whether the road is in the pothole or the pothole is in the road.)  में। इसका जवाब शायद नगर निगम के इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारी (Perhaps the municipal corporation’s engineers and responsible officials…) ही दे सकते हैं।

 

मामला नगर निगम क्षेत्र (Case pertains to the Municipal Corporation area.) के रामलीला मैदान के पीछे स्थित मार्ग का है, जहां प्रतिदिन लगभग 5 से 7 हजार लोगों का आवागमन होता है। मिश्रा पॉलीक्लिनिक अस्पताल, गैस गोदाम, आसपास की बस्तियों और अन्य आवासीय क्षेत्रों के लोग इसी रास्ते से गुजरते (People from other residential areas pass through this route.) हैं। लेकिन लोगों को सड़क पर चलने के बजाय एक तरह के “मिनी तालाब” को पार करके अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।

 

हैरानी की बात यह है कि यह तालाब किसी प्राकृतिक कारण  (A pond due to some natural cause) से नहीं बना, बल्कि करीब चार वर्ष पहले निर्मित सड़क पर बने विशाल गड्ढे में जमा पानी का परिणाम (The result of water accumulating in a massive pothole on a road built years ago.) है। वर्षों से यह गड्ढा नगर निगम के इंजीनियरों (For years, this pit has been hidden under the supervision of the Municipal Corporation engineers.) , अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भ्रष्टाचार की गहराई का आईना (A mirror reflecting the depth of corruption for public representatives)  दिखा रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की आंखें अब तक नहीं खुली (Those responsible have still not opened their eyes.) हैं।

 

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात में स्थिति और भयावह (The situation is worse during the rainy season) हो जाती है। सड़क पर जलभराव, कीचड़ और गंदगी के कारण राहगीरों, स्कूली बच्चों, मरीजों और दोपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना (Two-wheeler riders face major inconvenience.)  करना पड़ता है। कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन सुधार के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिले (Received only assurances in the name of reform.) हैं।

 

 

करोड़ों रुपये सड़क, नाली और स्वच्छता के नाम पर खर्च करने वाला नगर निगम (The municipal corporation that spends in the name of cleanliness.) आखिर शहर की मूलभूत व्यवस्थाओं को संभालने में असफल क्यों दिखाई (After all, why did it appear to fail in managing the city’s basic amenities?) दे रहा है? यह सवाल अब आम जनता खुलकर पूछ रही है।

 

 

नागरिकों का आरोप (Allegations by citizens) है कि महापौर रानी अग्रवाल, नगर निगम अध्यक्ष देवेश पांडे और आयुक्त सविता प्रधान के कार्यकाल (Commissioner Savita Pradhan’s tenure) में पहली बार शहर के कई हिस्सों में गंदगी, जर्जर सड़कें, नालियों में कचरे का अंबार और बदबूदार माहौल जैसी समस्याएं लगातार बढ़ती दिखाई (Problems like smelly environment are seen increasing continuously.) दे रही हैं।

 

जनता का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी एक बार इस सड़क से गुजर जाएं (The responsible officials should travel along this road at least once.) तो उन्हें विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ दिखाई  (The gap between the ground realities is clearly visible.) देगा। फिलहाल यह गड्ढा सिर्फ सड़क की बदहाली नहीं, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर (It also raises a big question on the functioning and accountability of the Municipal Corporation.) रहा है।

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