Singrauli News: सिंगरौली में बैढ़न-बरगवां सड़क बनी गड्ढों का जाल, टोल वसूली जारी फिर भी मरम्मत गायब—एमपीआरडीसी की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल?

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Singrauli News: सिंगरौली में बैढ़न-बरगवां सड़क बनी गड्ढों का जाल, टोल वसूली जारी फिर भी मरम्मत गायब—एमपीआरडीसी की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल?

नई ताकत न्यूज नेटवर्क | सिंगरौली

Singrauli News:  सिंगरौली जिला मुख्यालय बैढ़न से बरगवां को जोड़ने वाले करीब 23 किलोमीटर लंबे सड़क मार्ग की हालत लगातार खराब (The condition of the road remains consistently poor.) होती जा रही है। चमेली मोड़ से नौगई तक सड़क पर एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए (Hundreds of large potholes have become a source of trouble for motorists.)  हैं।
बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और दुर्घटना का खतरा बढ़ (Depth cannot be judged and the risk of accident increases) जाता है। सड़क की बदहाली के कारण 23 किलोमीटर का सफर पूरा करने में 45 मिनट से अधिक समय लग रहा है। इस मार्ग पर मालवाहक वाहनों से टोल वसूली की जा (Toll should be collected from goods vehicles on the route) रही है। निर्धारित व्यवस्था के तहत मालवाहकों से टोल लिया जाना अपने आप में मुद्दा (Collection of toll from freight carriers under the prescribed system is an issue in itself.)  नहीं है। असली सवाल सड़क के रखरखाव का है। सड़क पर गड्ढे होने के बाद उन्हें भरने और सड़क को आवागमन योग्य (Filling potholes on the road and making it motorable) बनाए रखने की जिम्मेदारी टोल प्लाजा के संविदाकार (Responsibility for maintenance lies with the toll plaza contractor.) की है। बताया जा रहा है कि गड्ढों की जानकारी मिलने के बाद 24 घंटे के भीतर उनकी मरम्मत (Repair potholes within 24 hours of receiving information about them) किए जाने का प्रावधान है, लेकिन मौके पर इसका पालन होता नजर नहीं आ रहा है। वहीं सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बने होने के बावजूद नियमित मरम्मत नहीं होने से व्यवस्था पर सवाल उठ (Despite the presence of potholes at various places on the road, questions are raised on the system due to lack of regular repairs.) रहे हैं। वाहन चालक गड्ढों से बचने के लिए अचानक सड़क की दिशा बदलने को मजबूर (Suddenly forced to change direction of the road) होते हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति खतरनाक बनी हुई है। बारिश में पानी से भरे गड्ढे दुर्घटना का बड़ा कारण बन (Water-filled potholes become a major cause of accidents during the rains.) सकते हैं।

 

 

 

एमपीआरडीसी की निगरानी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल म.प्र. सड़क विकास निगम यानी एमपीआरडीसी की निगरानी व्यवस्था (The big question: The monitoring system of the M.P. Road Development Corporation (MPRDC).)  पर है। जब संविदाकार पर सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी तय (Responsibility for road maintenance fixed on the contractor.) है और गड्ढों को समय सीमा में भरने का प्रावधान बताया जा रहा है, तो फिर सड़क पर सैकड़ों गड्ढे क्यों मौजूद हैं? क्या एमपीआरडीसी के अधिकारी नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं? यदि निरीक्षण हो रहा है तो संविदाकार को तत्काल मरम्मत (If inspection is taking place, the contractor should carry out immediate repairs.) के लिए बाध्य करने की कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? वहीं एमपीआरडीसी के अधिकारी संविदाकार पर प्रभावी दबाव क्यों नहीं बना पा रहे हैं? यह बड़ा सवाल है। इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है, यह टोल प्लाजा के संविदाकार और एमपीआरडीसी के जिम्मेदार अधिकारी ही बता सकते हैं। फिलहाल सड़क की हालत यह सवाल जरूर खड़ा कर रही है कि जब रखरखाव की जिम्मेदारी और समय सीमा तय है तो उसका पालन जमीन पर क्यों नहीं (If the responsibility for maintenance and the timeframe have been fixed, why aren’t they being adhered to on the ground?)  दिख रहा।

 

 

23 किमी का सफर,45 मिनट से ज्यादा
आलम यह है कि बैढ़न से बरगवां तक की दूरी करीब 23 किलोमीटर है, लेकिन सड़क की बदहाली के चलते इस दूरी (But due to the poor condition of the road, this distance)  को तय करने में 45 मिनट से अधिक समय लग रहा है। चमेली मोड़ से नौगई तक गड्ढों की भरमार ने यातायात की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। स्थानीय वाहन चालकों ने सड़क के गड्ढों को तत्काल भरने, नियमित निरीक्षण कराने और लापरवाही (Local motorists demanded the immediate filling of potholes, regular inspections, and action regarding negligence…)  की स्थिति में संविदाकार पर अनुबंध के अनुसार कार्रवाई की मांग की है। वहीं यह भी आरोप है कि समय-समय पर सड़क का मरम्मत नही करते। लिहाजा गड्ढे दिनों दिन तालतलैया का रूप ले रहे हैं। इसमें कहीं न कहीं एमआरडीसी अमले की घोर लापरवाही मानी (Gross negligence on the part of the MRDC staff was acknowledged to some extent.) जा रही है।

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