Singrauli News: सिंगरौली में टोयोटा एजेंसी का झांसा देकर जमीन हड़पने की साजिश का आरोप, फर्जी वरिष्ठ प्रबंधक बनकर रजिस्ट्री कराने का दावा; पुलिस से जांच और FIR की मांग

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Singrauli News: सिंगरौली में टोयोटा एजेंसी का झांसा देकर जमीन हड़पने की साजिश का आरोप, फर्जी वरिष्ठ प्रबंधक बनकर रजिस्ट्री कराने का दावा; पुलिस से जांच और FIR की मांग

नई ताकत न्यूज नेटवर्क | सिंगरौली

Singrauli News:  सिंगरौली में टोयोटा कंपनी के नाम पर एजेंसी खोलने का झांसा देकर जमीन लेने और षड्यंत्रपूर्वक रजिस्ट्री कराने के आरोपों (Allegations of acquiring land and fraudulently getting the sale deed registered by deceiving someone with the promise of opening a Toyota dealership._) को लेकर पुलिस अधीक्षक सिंगरौली से शिकायत की गई है।शिकायत में टोयोटा कंपनी के कथित वरिष्ठ प्रबंधक (The complaint alleged that a senior manager of the Toyota company) भगवानदास पटवा, कनिष्ठ प्रबंधक राधेश्याम पाटकर तथा तनय सेठ गोपाल पटवा की भूमिका की जांच कर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की मांग की (Demanded the registration of a criminal case after investigating the role played.) गई है। मामला वर्ष 2023 में हुई जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ा बताया गया है। पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में शिकायतकर्ताओं ने बताया कि ग्राम नौगढ़, तहसील सिंगरौली स्थित उनकी जमीन ग्राम नौगढ़ में कनवेयर बेल्ट के पास फोरलेन से लगी हुई है।

 

 

आवेदन में खसरा क्रमांक 1297/1, 1297/2, 2990/1/2, 2990/2/1, 2990/1/1 सहित कुल 0.470 हेक्टेयर, यानी लगभग एक एकड़ 17 डिसमिल भूमि का उल्लेख किया गया है। आवेदन के अनुसार घटना से करीब तीन-चार महीने पहले भगवानदास पटवा बोलेरो वाहन से ग्राम नौगढ़ पहुंचे और ग्रामीणों से टोयोटा गाड़ियों की एजेंसी खोलने के लिए जमीन की तलाश करने (To look for land to set up a Toyota dealership, in consultation with the villagers…)  लगे। शिकायतकर्ताओं द्वारा अपनी जमीन की जानकारी दिए जाने के बाद कथित तौर पर एजेंसी खोलने के लिए जमीन तीस की मांग की (After the information was provided, a demand was allegedly made for land to set up the agency.) गई। शिकायत में आरोप है कि जमीन देने पर किराया मिलने और गांव के बेरोजगार लोगों को नौकरी दिलाने का भरोसा (The complaint alleges that the promise of rent and employment for the unemployed villagers was made on giving away the land.) दिया गया। साथ ही 15 वर्ष के लिए जमीन का एग्रीमेंट कराने की बात कही गई।

 

 

विके्रताओं ने लिया 75 लाख रूपये कैश भुगतान !
शिकायत के मुताबिक प्रार्थीगण तथा कथित वरिष्ठ प्रबंधक (According to the complaint, the applicants and the alleged senior manager) भगवानदास पटवा के बीच जमीन का किराया 50 हजार रुपये प्रतिमाह तय हुआ। इसके बाद एग्रीमेंट कराने के लिए सहमति बनी। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि भगवानदास पटवा ने आगे की प्रक्रिया के लिए सभी लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और खाता नंबर सहित अन्य दस्तावेज मांगे। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले को षड्यंत्रपूर्वक जमीन रजिस्ट्री (The complainants conspired to register the entire land case.)  कराने से जोड़ते हुए पुलिस से इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि सभी विके्रता नकद भुगतान पूर्व में ही प्राप्त कर लिया है। जबकि यह भूमि विक्रय के प्रावधान में नही है, इसीलिए मामला और भी संदेहास्पद (Since this land is not covered under the provisions for sale, the matter appears all the more suspicious.) माना जा रहा है।

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