बातचीत का भरोसा या हमला करने की तैयारी? ट्रंप की चाल पर उठे बड़े सवाल?
US प्रेसिडेंट (US President) डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध खत्म होने का इशारा किया, लेकिन ईरान के दो एनर्जी प्लांट्स पर हमले (Attacks on two energy plants) और ईरान के ट्रंप के दावे को खारिज (Trump’s claim dismissed) करने से इलाके में तनाव बढ़ गया है।
US प्रेसिडेंट(US President) डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध खत्म (the war is over) करने का इशारा किया है, लेकिन ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रम (recent developments) ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार सुबह, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के करीब एक सेमी-ऑफिशियल न्यूज़ एजेंसी (Semi-official news agency) ने देश के दो ज़रूरी एनर्जी प्लांट्स पर एयरस्ट्राइक (Airstrikes on energy plants) की खबर दी।
US-इज़राइल ने ज़िम्मेदारी नहीं ली
न तो इज़राइल और न ही यूनाइटेड स्टेट्स ने सोमवार के हमलों की ज़िम्मेदारी (responsibility for the attacks) ली। दोनों देशों की स्ट्रैटेजी अक्सर (strategy often) अपने हमलों को पब्लिकली स्वीकार (publicly accepted) न करने की रही है। रिपोर्ट में यह भी साफ़ नहीं किया गया कि इन दोनों प्लांट्स को सीधे टारगेट किया गया था या किसी दूसरे हमले में उन्हें नुकसान पहुँचाया गया था। इन घटनाओं ने रीजनल टेंशन (regional tension) और ग्लोबल सिक्योरिटी पर नए सवाल (New questions on global security) खड़े कर दिए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर शक
सैसे ने साफ़ किया है कि US और ईरान के बीच इन्फॉर्मेशन (information) और बयानबाज़ी का खेल जारी (The rhetoric continues) है। डोनाल्ड ट्रंप के शांति के संकेतों के बावजूद, ये घटनाएँ रीजनल सिक्योरिटी (regional security) के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। दोनों तरफ़ से बयानों और मीडिया रिपोर्ट्स (media reports) में अंतर ने ग्लोबल कम्युनिटी (global community) में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ पैदा की हैं।







