भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को बड़ी राहत, वेस्ट एशिया में गंभीर तनाव के बीच 46,000 टन LPG ले जा रहा ‘ग्रीन साल्वी’ टैंकर सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करता है

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Saturday, April 4, 2026 8:26 AM

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भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को बड़ी राहत, वेस्ट एशिया में गंभीर तनाव के बीच 46,000 टन LPG ले जा रहा ‘ग्रीन साल्वी’ टैंकर सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करता है

वेस्ट एशिया में चल रहे युद्ध (war) और जियोपॉलिटिकल तनाव (Geopolitical tensions) के बीच, भारत की एनर्जी सिक्योरिटी (India’s Energy Security) के मोर्चे पर एक बहुत राहत देने वाली खबर है। स्ट्रेटेजिक रूप (Strategic form) से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से 46,000 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (Metric tons of Liquefied Petroleum Gas)  (LPG) ले जा रहा भारतीय टैंकर (Indian Tanker) ‘ग्रीन साल्वी’ सुरक्षित रूप से अपनी मंज़िल की ओर बढ़ गया है। यह सफलता भारत की एक्टिव ‘एनर्जी डिप्लोमेसी’ का नतीजा मानी जा रही है, जिसके तहत ईरानी अधिकारियों ने नई दिल्ली (Officials in New Delhi) और तेहरान के बीच हाई-लेवल बातचीत के बाद इन जहाजों को “मित्र राष्ट्र” के जहाजों के रूप में सुरक्षित ट्रांज़िट की अनुमति (Allowing safe transit for ships)  दी। यह टैंकर तीन भारतीय जहाजों के उस काफिले को लीड कर रहा है, जो क्षेत्रीय संघर्ष के बावजूद इस खतरनाक समुद्री रास्ते (Dangerous Sea Routes) से गुजरने में सफल रहा है।

 

 

 

 

 

मौजूदा हालात और सिक्योरिटी रिस्क (Security Risk) को देखते हुए, इंडियन फ्लीट ने ओमान के तट के करीब ‘दक्षिणी रास्ते’ का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। आम तौर पर कार्गो जहाज उत्तरी लेन (Cargo Ship Northern Lane) का इस्तेमाल करते हैं जो ईरानी कंट्रोल के ज़्यादा पास है, लेकिन इस बार संभावित टकराव (Potential Conflict)  और बुरी घटनाओं से बचने के लिए ज़्यादा सुरक्षित दूसरा (A safer alternative to avoid unfortunate events.) रास्ता चुना गया है। इन जहाजों के आने-जाने में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Iranian Revolutionary Guard Corps)  (IRGC) की नेवी ने मदद की है, जो दोनों देशों के बीच मज़बूत आपसी रिश्तों का सबूत है। ग्रीन साल्वी के साथ चल रहे दो और इंडियन LPG कैरियर (Indian LPG Carrier)  के भी अगले कुछ घंटों में स्ट्रेट पार करने की उम्मीद है।

 

 

 

 

 

भारत अपनी LPG ज़रूरतों (India’s LPG requirements) का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से इंपोर्ट (Imports from Gulf Countries) करता है, ऐसे में ‘ग्रीन साल्वी’ का सफल सफर घरेलू बाज़ार के लिए लाइफलाइन साबित होगा। एनर्जी एक्सपर्ट्स (Energy Experts) का मानना ​​है कि अगर सप्लाई चेन में थोड़ी सी भी रुकावट आती, तो देश में कुकिंग गैस (Cooking Gas in the Country) की भारी कमी और कीमतें बहुत ज़्यादा बढ़ सकती थीं। इस कंसाइनमेंट के आने से न सिर्फ रिज़र्व बढ़ेगा, बल्कि आम लोगों को गैस की बिना रुकावट सप्लाई भी पक्की (Uninterrupted gas supply also assured.) होगी। पश्चिम एशिया के अस्थिर माहौल के बावजूद, भारत ने अपनी दूर की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बल (Forces in International Relations) पर एक बार फिर अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

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