BREAKING NEWS: NCERT विवाद में तीन एक्सपर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, ‘ज्यूडिशियरी में करप्शन’ चैप्टर को ब्लैकलिस्ट करने के खिलाफ दलील दी, कहा- कलेक्टिव लिख रहा था
BREAKING NEWS: NCERT की क्लास 8वीं की नई सोशल साइंस बुक (New Social Science Book) ‘समाज की खोज’ के विवादित चैप्टर (The Controversial Chapters of ‘Khoj’) ने अब एक नया मोड़ (A New Turn) ले लिया है। इस चैप्टर को तैयार करने वाले तीन बड़े एकेडेमिक्स—प्रोफेसर मिशेल डैनिनो (Professor Michel Danino) , सुपर्णा दिवाकर (Suparna Divakar) और आलोक प्रसन्ना कुमार—ने खुद को ब्लैकलिस्ट किए (Blacklisted themselves) जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया (Knocked on the Supreme Court’s door against…) है। इन एक्सपर्ट्स की मुख्य दलील यह (The experts’ main argument is this.) है कि विवादित चैप्टर ‘हमारे समाज में ज्यूडिशियरी की भूमिका’ किसी एक व्यक्ति (‘The Role of the Judiciary in Society’—[not limited to] any single individual) की रचना नहीं थी, बल्कि एक बड़ी कलेक्टिव प्रोसेस का नतीजा (The Result of a Collective Process) थी। उन्होंने कोर्ट से अपनी एकेडमिक साख (Academic credentials from the court) पर लगे दशकों पुराने दागों को धोने के लिए बोलने का मौका मांगा (He sought an opportunity to speak in order to wash away old stains.) है।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने क्लास 8 की एक टेक्स्टबुक में ‘ज्यूडिशियरी में करप्शन’ (‘Corruption in the Judiciary’ in Textbooks) जैसे सेंसिटिव मुद्दे के जिक्र (Mentioning a sensitive issue) को ‘ऑब्जेक्टिव’ बताया। कोर्ट ने कहा था कि इस तरह के कंटेंट से ज्यूडिशियरी की इमेज खराब (Judiciary’s Image Tarnished by Content) होती है, जिसके बाद किताब के पब्लिकेशन (Book Publications) और सर्कुलेशन पर तुरंत बैन (Immediate Ban on Circulation) लगा दिया गया। कोर्ट के कड़ा रुख अपनाने के बाद 11 मार्च को तीनों एक्सपर्ट्स को सभी एकेडमिक जिम्मेदारियों (All academic responsibilities to the experts) से अलग करने का निर्देश (Instruction to Separate) दिया गया था। पिटीशनर्स के वकील ने चीफ जस्टिस (The petitioners’ counsel addressed the Chief Justice.) सूर्यकांत की बेंच के सामने साफ किया कि उनका मकसद किसी इंस्टीट्यूशन को टारगेट (Targeting the Institution) करना नहीं था, बल्कि नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत कॉन्टेक्स्ट (Context under the New Education Policy) को साफ करना था।
सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती के बाद, केंद्र सरकार (Central government) और NCERT ने भविष्य के कोर्सेज को रिव्यू (NCERT Reviews Future Courses) करने के लिए हाई-लेवल कमेटियां (High-Level Committees) बनाई हैं। रिटायर्ड जज इंदु मल्होत्रा और सीनियर एडवोकेट (Senior Advocate) के.के. वेणुगोपाल जैसे दिग्गजों की तीन मेंबर वाली कमेटी (Member-exclusive comments) बनाई गई है। इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) ने भी नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (National Judicial Academy) के साथ मिलकर करिकुलम (Curriculum) के अलग-अलग पहलुओं पर विचार करने के लिए 20 मेंबर वाली हाई पावर कमेटी बनाई है। फिलहाल, यह मामला न सिर्फ एकेडेमिया बल्कि कानूनी गलियारों (Academia—or rather, legal corridors) में भी चर्चा का विषय (Subject of Discussion) बना हुआ है।







