BREAKING NEWS: US ने तैयार किया खतरनाक ‘ब्लैकआउट बम’, बिना खून-खराबे के बिजली सप्लाई रोकने की ईरान की ताकत, ग्रेफाइट फिलामेंट्स से ग्रिड फेलियर में माहिर, कैसे करें?

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Wednesday, April 8, 2026 7:18 AM

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BREAKING NEWS: US ने तैयार किया खतरनाक ‘ब्लैकआउट बम’, बिना खून-खराबे के बिजली सप्लाई रोकने की ईरान की ताकत, ग्रेफाइट फिलामेंट्स से ग्रिड फेलियर में माहिर, कैसे करें?

BREAKING NEWS:  US और ईरान के बीच बढ़ते तनाव (Rising Tensions) के बीच US ‘ब्लैकआउट बम’ (BLU-114/B) ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा (Captured the attention of the entire world.)  है। इसे ‘सॉफ्ट बम’ भी कहा जाता है क्योंकि यह इमारतों या इंसानों (Because this—buildings or humans—) को फिजिकल नुकसान पहुंचाए (Inflict physical harm) बिना सिर्फ दुश्मन देश के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट (Targeting Power Infrastructure) करता है। यह हथियार एक्सप्लोसिव के बजाय केमिकली ट्रीटेड (Weapons that are chemically treated rather than explosive.)  ‘कार्बन ग्रेफाइट फिलामेंट्स’ का इस्तेमाल करता है। जब इसे किसी टारगेट पर गिराया (Dropped onto the target) जाता है, तो यह हवा में ही मकड़ी के जाले की तरह फैल (Spreading through the air like a spider’s web) जाता है और बिजली के ट्रांसफॉर्मर (Electrical Transformers)  और हाई-वोल्टेज लाइनों (High-voltage lines)  पर गिरता है, जिससे शॉर्ट-सर्किट होता है। इससे पूरे शहर या देश की लाइट एक पल में चली सकती है, जबकि फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर (High-voltage lines) काफी हद तक सही-सलामत रहता है।

 

 

 

 

 

 

US ने पहले भी युद्धों के दौरान ब्लैकआउट बमों का असरदार तरीके (Effective Methods of Blackouts During Wars) से इस्तेमाल किया है। 1991 के गल्फ वॉर में, U.S. नेवी ने टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों से इराक पर ग्रेफाइट फिलामेंट (Graphite Filaments over Iraq via Cruise Missiles)  गिराए, जिससे सिर्फ़ 24 घंटे में इराक की 85 परसेंट पावर सप्लाई बंद (Power supply off) हो गई। इसी तरह, 1999 में सर्बिया के खिलाफ़ ऑपरेशन एलाइड फोर्सेज़ (Operation Allied Force) के दौरान, U.S. F-117 फाइटर्स ने इन बमों का इस्तेमाल करके सर्बिया की 70 परसेंट पावर सप्लाई काट दी थी। इन एक्शन ने दुश्मन सरकारों (Hostile governments)  पर बहुत ज़्यादा साइकोलॉजिकल प्रेशर डाला (Exerted psychological pressure) और उनकी मिलिट्री कैपेबिलिटी को कमज़ोर (Weakening military capabilities) कर दिया, जिससे बिना कोई बड़ी तबाही मचाए युद्ध (Wars That Wreak Havoc) की दिशा बदल गई।

 

 

 

 

 

 

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि ईरान के बड़े इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड को ठप करना यूनाइटेड स्टेट्स (Shutting Down the Major Electricity Grid in the United States)  के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती (It could be a major challenge.)  है। ईरान में लगभग 130 थर्मल पावर प्लांट हैं जिनकी कैपेसिटी  (Capacity) 78,000 MW है और यह एक बड़े इलाके में फैला हुआ है। हालांकि, ईरान का ग्रिड पहले से ही पावर की कमी और टेक्निकल प्रॉब्लम से परेशान (Troubled by technical problems) है, जिससे ‘ब्लैकआउट बम’ का असर और भी खतरनाक (Dangerous) हो गया है। इन बमों को U.S. एयर फ़ोर्स के CBU-94 वेपन सिस्टम के ज़रिए B-2 या F-35 जैसे मॉडर्न एयरक्राफ़्ट से एकदम सही निशाना लगाकर (Striking with pinpoint accuracy from a modern aircraft) गिराया जा सकता है। यह तकनीक लड़ाई के मैदान में बिना (Without technology on the battlefield…) किसी ‘कोलैटरल डैमेज’ के दुश्मन को घुटनों पर लाने का एक मॉडर्न तरीका (A modern way to bring the enemy to their knees.) बन गई है।

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