BREALKING NEWS: वेस्ट एशिया संकट और बढ़ती लागत ने टेलीविज़न इंडस्ट्री पर संकट ला दिया है, टीवी सेट महंगे हो सकते हैं
BREAKING NEWS: टेलीविज़न इंडस्ट्री (Television Industry) इन दिनों दोहरी मार झेल (Facing a double blow) रही है, वेस्ट एशिया में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण समुद्री माल ढुलाई (Maritime Freight Due to Geopolitical Tensions) (फ्रेट) महंगी हो रही है, जबकि RAM और प्लास्टिक जैसे कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ (The prices of raw materials such as plastic have also risen.) गई हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने इस संकट (The rupee’s weakness against the dollar has exacerbated this crisis.) को और गहरा कर दिया है, जिससे देश में टीवी प्रोडक्शन काफी (TV production in the country is substantial.) महंगा हो गया है। सुपर प्लास्ट्रोनिक्स (Super Plastronics) (SPPL) के CEO अवनीत सिंह मारवाह के अनुसार, पिछले छह महीनों में कीमतें काफी बढ़ (Prices have risen significantly over the past six months.) गई हैं, जिससे एक बेसिक 32-इंच का टीवी जिसकी कीमत (A TV whose price…) पहले 9,000 रुपये थी, अब 11,000 रुपये को पार कर गया है।
बढ़ती कीमतों का सीधा (The direct impact of rising prices) असर अब ग्राहकों की पसंद (Customer Favorites) और उनके बजट पर दिख रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स (Market Experts) का कहना है कि जो ग्राहक पहले 55-इंच का बड़ा टेलीविज़न खरीदने (To buy a large television) की योजना बना रहे थे, वे अब बजट बिगड़ने (Now that the budget is going awry…) के डर से 50-इंच मॉडल की ओर रुख कर रहे हैं। इसी तरह, प्रीमियम सेगमेंट (Premium Segment) में भी 65-इंच के बजाय 55-इंच टीवी की डिमांड बढ़ी है। हालांकि बड़ी कंपनियों ने अभी तक कॉस्ट का पूरा बोझ कस्टमर्स (Large companies have not yet passed the full burden of costs onto customers.) पर नहीं डाला है और अपना मार्केट शेयर बचाने (To protect its market share) के लिए कुछ नुकसान खुद उठा रही हैं, फिर भी मिडिल क्लास कस्टमर्स अपनी खरीदारी टाल (Middle-class customers are postponing their purchases.) रहे हैं।
हायर इंडिया के प्रेसिडेंट (President of Haier India) एन.एस. सतीश ने कहा कि मार्केट का झुकाव छोटे मॉडल्स (Market leans towards smaller models.) की तरफ है, लेकिन आसान इंस्टॉलमेंट स्कीम (Easy Installment Scheme) (EMI) की वजह से बड़े स्क्रीन वाले टीवी की डिमांड अभी भी बनी हुई है। कंपनियों का लगभग आधा बिजनेस महीने की इंस्टॉलमेंट (Approximately half of the companies’ business consists of monthly installments.) पर आधारित है, जिससे कस्टमर्स पर कीमतों में बढ़ोतरी का तुरंत असर कम होता है। फिलहाल, इंडस्ट्री को उम्मीद (Industry Hopes) है कि साल के दूसरे हिस्से में आने वाले फेस्टिव सीजन में डिमांड बेहतर होगी। हालांकि, जब तक सप्लाई चेन और रॉ मटेरियल की कीमतें ग्लोबली स्टेबल नहीं हो जातीं, तब तक टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए चुनौतियां बनी रहेंगी।







