देश में गहराते एनर्जी संकट के बीच केंद्र सरकार का ऐतिहासिक फैसला, पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी में Rs 10 की भारी कटौती, आम जनता को दी बड़ी राहत
NEW DELHI: ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल (Surge in crude oil prices) के बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों (The Central Government has [addressed] the citizens of the country) को बड़ी राहत दी है। फाइनेंस मिनिस्ट्री की ओर से देर रात जारी नोटिफिकेशन (Issued Notification) के मुताबिक, सरकार ने पेट्रोल (The government has [addressed] petrol.) पर एक्साइज़ ड्यूटी Rs 13 से घटाकर सिर्फ़ Rs 3 और डीज़ल पर Rs 10 से घटाकर ज़ीरो कर दी है। इस ऐतिहासिक फैसले का मकसद इंटरनेशनल मार्केट(Objective: The International Market) में ब्रेंट क्रूड के $119 प्रति बैरल तक पहुंचने के बावजूद घरेलू स्तर पर फ्यूल की कीमतों को स्थिर रखना है। केंद्रीय मंत्री (Union Minister) हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार ने रेवेन्यू का भारी नुकसान उठाकर आम आदमी और तेल कंपनियों को इस ग्लोबल संकट (Oil companies [face] this global crisis.) से बचाने की कोशिश की है।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष (Conflict) के कारण देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें (Long queues at petrol pumps) और ‘नो स्टॉक’ के साइन देखे गए थे, जिसके बाद सरकार ने साफ किया है कि भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार (Ample reserves of crude oil) है। इंडियन ऑयल और HPCL जैसी बड़ी कंपनियों ने ग्राहकों को भरोसा (Companies have earned the trust of customers.) दिलाया है कि देश में पेट्रोल, डीज़ल या LPG की कोई कमी नहीं है। हालांकि, प्राइवेट कंपनी ‘नायरा एनर्जी’ ने बढ़ती इनपुट कॉस्ट की वजह से अपने पेट्रोल की कीमत (Petrol Price) में 5 रुपये और डीज़ल की कीमत में 3 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। सरकार ने घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता (The government has prioritized domestic supply.) देने और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए प्राइवेट रिफाइनरियों पर एक्सपोर्ट टैक्स (Export Tax on Private Refineries) भी लगाया है।
पेट्रोलियम मिनिस्ट्री (Ministry of Petroleum) ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया (Social Media) पर फैल रही फ्यूल की कमी की अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक बाइंग से बचें। सरकार ने साफ कर दिया है कि सप्लाई चेन (Supply Chain) पूरी तरह से ठीक है और सिर्फ ऑफिशियल जानकारी पर भरोसा (Reliance on Official Information) है। एक्साइज ड्यूटी में यह कटौती तेल कंपनियों (Oil Company Deductions) को हो रहे भारी नुकसान (पेट्रोल पर 24 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर 30 रुपये प्रति लीटर) को कम करने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले की तारीफ करते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे सामान के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कंट्रोल (Control over Transportation Costs) में रहेगा और महंगाई पर काबू पाने में मदद (Help in controlling inflation) मिलेगी।







