देश में गहराते LPG संकट के बीच ‘केरोसिन युग’ की वापसी, ₹400 का पुराना चूल्हा अब ₹5000 में बिक रहा, गया के बाजारों से स्टॉक पूरी तरह खत्म
ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध से ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित (Global Supply Chains Disrupted by War) होने से भारत में LPG (LPG) संकट गहरा (Deepening Crisis) गया है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों (Beneficiaries of the Ujjwala Scheme) को समय पर गैस सिलेंडर (Gas Cylinder on Time) नहीं मिलने पर केंद्र सरकार ने केरोसिन (The Central Government has… kerosene) (मिट्टी के तेल) के नियमों में 60 दिन की ढील दी है। PDS का केरोसिन अब पेट्रोल पंपों पर भी मिलेगा (Kerosene will now be available at petrol pumps as well.) । जिला आपूर्ति कार्यालय (District Supply Office) ने गया जिले में 1,44,000 लीटर केरोसिन स्टॉक करने का आदेश (Order to Stock Kerosene) दिया है। इस बदलाव के कारण ग्रामीण (Villagers Affected by Change) और शहरी क्षेत्रों के रसोईघर (Kitchens in Urban Areas) फिर से चूल्हे (Stoves) , लालटेन (Lantern) और पेट्रोमेक्स की ओर बढ़ (Heading towards the Petromax) रहे हैं, जिससे पुराने दौर की यादें ताजा (Memories of that era are revived.) हो गई हैं।
केरोसिन की उपलब्धता (Availability of Kerosene) बढ़ने से बाजार में चूल्हे की मांग में अप्रत्याशित उछाल (Unexpected Surge in Demand for Stoves in the Market) आया है। गया के रमना रोड जैसे बड़े मार्केट से चूल्हे पूरी तरह आउट ऑफ स्टॉक (Out of stock) हैं। दुकानदारों का कहना है कि 2015 के बाद मैन्युफैक्चरिंग बंद होने से नया स्टॉक नहीं (No new stock due to the suspension of manufacturing.) आ रहा है। जो चूल्हे पहले 400 से 600 रुपये में मिलते थे, उनकी कीमत अब 3,000 से 5,000 रुपये तक पहुंच गई है। लोग अपने कबाड़ में पड़े पुराने चूल्हे निकालकर रिपेयर (Retrieving old stoves discarded as scrap and repairing them.) के लिए मैकेनिक (Mechanic) के पास जा रहे हैं, लेकिन स्पेयर पार्ट्स (spare parts) और पिन की कमी से रिपेयर भी मुश्किल (Repairs Are Difficult Due to Shortages) हो गया है। इसके विकल्प के तौर पर लोग अब स्टील के चूल्हे (Steel Stoves) और कोयले वाले हीटर देख (Look at the coal heaters.) रहे हैं।
स्टोव के बढ़ते ट्रेंड पर हेल्थ एक्सपर्ट्स (Health Experts on the Rising Trend of Stoves) ने सख्त चेतावनी दी है। डॉ. संजय प्रसाद के मुताबिक, केरोसिन जलाने से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड (Carbon monoxide emitted from burning kerosene) और कालिख फेफड़ों के लिए बेहद नुकसानदायक (Soot is extremely harmful to the lungs.) है। इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) और निमोनिया (Pneumonia) जैसी सांस की बीमारियां होने का खतरा बढ़ (Increased risk of respiratory diseases) जाता है, खासकर उन महिलाओं के लिए जो बंद किचन में खाना (For women who cook in enclosed kitchens) बनाती हैं। प्रोफेसर तनवीर (Professor Tanveer) आलम ने इसे ‘पीछे की ओर कदम’ बताया है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि अगर आपको चूल्हे का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, तो वेंटिलेशन (Ventilation) पर खास ध्यान दें। फिलहाल, महंगाई (Dearness) और कमी के बीच, आम आदमी अपना पेट भरने के लिए चूल्हे और लकड़ी का सहारा (Wooden Support) ले रहा है, और सेहत को होने वाले खतरों से बच रहा है।







