कोरसर कोठार में सैकड़ों आदिवासी परिवारों को सड़क का संकट
रोगी अब भी खाट पर ढोए जाने को मजबूर
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देवेन्द्र तिवारी
सिंगरौली। चितरंगी ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत कोरसर कोठार के नरकटहवा टोला में निवासरत सैकड़ों आदिवासी परिवार आज भी बुनियादी सुविधा सड़क से वंचित हैं। सदियों से बसे इन परिवारों तक आज तक पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी है, जिसके कारण ग्रामीण रोजमर्रा की कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब किसी की अचानक तबीयत बिगड़ जाती है या प्रसव के समय अस्पताल ले जाना होता है, तो मरीज को खाट पर रखकर एक किलोमीटर से भी अधिक दूर पैदल ले जाना पड़ता है। इससे आगे जाकर कहीं वाहन की व्यवस्था मिल पाती है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाती है, क्योंकि संकरे और कीचड़ भरे रास्तों से मरीज को खाट पर ले जाना भी मुश्किल हो जाता है।
आदिवासी परिवारों का आरोप है कि हर चुनाव के समय — चाहे वह लोकसभा, विधानसभा या पंचायत चुनाव हो — नेता इसी पतली गली से होकर उनके घरों तक आते हैं और सड़क सहित कई वादे करते हैं। लेकिन चुनाव समाप्त होते ही पांच साल तक कोई भी नेता इलाके की सुध लेने नहीं आता।
यह भी उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र राज्य मंत्री राधा सिंह के विधानसभा क्षेत्र में आता है। साथ ही सिंगरौली की प्रभारी मंत्री संपत्तियां उइके और राज्य मंत्री राधा सिंह दोनों आदिवासी समाज से हैं। इसके बावजूद आदिवासियों की घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में सड़क निर्माण न होना सरकार के आदिवासी विकास के दावों पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।केंद्र और राज्य सरकारें आदिवासी हितैषी होने के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन कोरसर कोठार के वास्तविक हालात इन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरसते ये परिवार अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।







