इंदौर में गैस संकट गहराया, होटल और रेस्टोरेंट अब लकड़ी और कोयले पर निर्भर

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Monday, March 23, 2026 7:33 AM

इंदौर में गैस संकट गहराया, होटल और रेस्टोरेंट अब लकड़ी और कोयले पर निर्भर

INDORE NEWS:   शहर में इन दिनों LPG की कमी और बढ़ती कीमतों (prices) ने आम लोगों से लेकर होटल (hotel)  और रेस्टोरेंट कारोबारियों (restaurateurs) तक को मुश्किल (difficult) में डाल दिया है। एक तरफ प्रशासन ने गैस सप्लाई पर सख्त नियम लागू (The administration has implemented strict rules on gas supply.) कर दिए हैं – जैसे 25 दिन बाद ही रिफिल की इजाज़त – तो दूसरी तरफ कमर्शियल सिलेंडर (commercial cylinder) की सप्लाई पर रोक ने हालात और खराब कर दिए हैं। नतीजतन, लोग अब फ्यूल के दूसरे विकल्पों की ओर लौटने लगे हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

गैस एजेंसियों (gas agencies) के बाहर लोगों की लंबी लाइनें आम हो गई (Long lines became common) हैं। कस्टमर घंटों अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन सप्लाई कम (supply less) होने की वजह से सभी को समय पर सिलेंडर मिलना मुमकिन नहीं (It is not possible to get a cylinder) हो पा रहा है। रेस्टोरेंट संचालक (restaurant operator) रोहित का कहना है कि गैस खत्म होने के बाद हमें 2-3 दिन दुकान बंद रखनी पड़ी। अब उन्हें भट्टी खरीदकर कोयले (coal by purchasing furnace) और लकड़ी से समोसे-कचौरी (Samosa-kachori made from wood)  बनाने को मजबूर होना पड़ रहा है। होटल संचालक मिथिलेश का कहना है कि गैस की कमी से घर और होटल दोनों पर असर पड़ा। अब वे लकड़ी का इस्तेमाल कर (using wood) रहे हैं, नहीं तो धंधा बंद हो जाता। कोयला (Coal) और लकड़ी के बिज़नेस में तेज़ी (Boom in the timber business).

 

 

 

 

 

 

 

गैस संकट ने कोयला (gas crisis has affected coal)  और लकड़ी के बिज़नेस (wood business) को अचानक बढ़ावा दिया है। 50 साल से कोयले का बिज़नेस (coal business) कर रहे राजेंद्र सिंह खनूजा का कहना है कि वे पहली बार कोयले की इतनी डिमांड (So much demand for coal) देख रहे हैं। पहले गैस आसानी से मिलने की वजह से काम लगभग बंद हो गया था, लेकिन अब फिर से तेज़ी आ गई है। तेजिंदर सिंह खनूजा के मुताबिक, उनकी दुकान पर कई तरह का कोयला (Coal) मिलता है। चारकोल 40 रुपये प्रति kg, हार्ड कोर 40 रुपये, नट कोयला 70 रुपये और कोरुगेटेड कोयला 15 रुपये प्रति kg मिल रहा है। चीन का हार्ड कोयला महंगा है लेकिन डिमांड में है। अब होटल और रेस्टोरेंट के साथ-साथ आम लोग भी कम मात्रा में चारकोल खरीदकर घर पर स्टॉक रखने लगे हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बेकार लकड़ी के दाम भी बढ़े
लकड़ी का फर्नीचर (wooden furniture) बनाने वाले कारीगरों के पास भी अब कस्टमर (Customer) बढ़े हैं। ईश्वर शर्मा और सुनील विश्वकर्मा का कहना है कि पहले बेकार लकड़ी सस्ती बिकती थी, लेकिन अब डिमांड (demand)  बढ़ने की वजह से इसे भट्टों पर 5 से 10 रुपये प्रति kg बेचा जा रहा है। स्टॉक भी तेज़ी से खत्म हो रहा है।

 

 

 

 

 

 

 

 

कंडे (ऊपरी) को भी अच्छा सपोर्ट
गैस संकट (gas crisis) का असर इतना गहरा है कि लोग अब पारंपरिक फ्यूल (conventional fuel) की तरफ लौट रहे हैं। वेंडर शांति बाई कहती हैं कि पहले झुमके सिर्फ़ होली पर बिकते थे, लेकिन अब लोग रोज़ाना खरीद रहे हैं। गैस की कमी ने पुराने दिन (Gas shortages have haunted the old days) याद दिला दिए। इंदौर के कई इलाकों में 10-15 दुकानों पर कंडे बिक (Conde sold) रहे हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

एडमिनिस्ट्रेटिव नियमों पर उठ रहे सवाल
गैस रिफिल(gas refill)  पर 25 दिन के नियम और कमर्शियल सिलेंडर की कमी (shortage of commercial cylinders) ने व्यापारियों (traders) और आम जनता दोनों को मुश्किल (It is difficult for both the general public) में डाल दिया है। लोग एडमिनिस्ट्रेटिव (Administrative) से राहत की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि रोज़मर्रा की ज़िंदगी और बिज़नेस नॉर्मल (business normal) हो सके। इंदौर में गैस संकट ने न सिर्फ़ लोगों की रसोई बल्कि पूरे बिज़नेस स्ट्रक्चर (business structure)  पर असर डाला है। मॉडर्न फ्यूल से हटकर लोग पारंपरिक तरीकों – कोयला, लकड़ी और पराली की तरफ लौट रहे हैं। अगर जल्द ही कोई हल नहीं निकला, तो यह बदलाव लंबे समय तक दिख सकता है।

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