केंद्र सरकार का घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा तोहफा, 40 बड़े पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी जून 2026 तक पूरी तरह माफ, इंडस्ट्रीज़ को लागत में भारी राहत मिलेगी
पश्चिम एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव (Rising Geopolitical Tensions) और ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) में रुकावटों (Obstacles)के बीच, भारत सरकार ने घरेलू इंडस्ट्रीज़ (The Government of India has [supported] domestic industries.) को एक नई जान दी है। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) की ओर से जारी एक ज़रूरी नोटिफिकेशन (Important Notification) के मुताबिक, 40 बड़े पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी तुरंत खत्म(Customs Duty on Petrochemical Products Abolished Immediately) कर दी गई है। यह फैसला 2 अप्रैल, 2026 से लागू होगा और 30 जून, 2026 तक लागू रहेगा। सरकार का मुख्य मकसद US-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil prices) में आई तेज़ बढ़ोतरी से भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को सुरक्षा (Protection for Indian Manufacturers Against Rapid Surges) देना है, क्योंकि फरवरी से कच्चे तेल की कीमतें लगभग 50% बढ़ गई हैं।
ड्यूटी में छूट (Duty Exemption) की इस लिस्ट में मेथनॉल, एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यूनि, स्टाइरीन और एसिटिक एसिड जैसे ज़रूरी केमिकल के साथ-साथ पॉलीइथाइलीन (Polyethylene along with chemicals) , PVC (PVC) और PET (PET) चिप्स जैसे पॉलिमर (Polymer) भी शामिल हैं। इस कदम से टेक्सटाइल (Textiles) , ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और पैकेजिंग इंडस्ट्री (Packaging Industry) को सीधा फायदा होगा। खास तौर पर ऑटोमोटिव सेक्टर में इस्तेमाल (Usage in the Automotive Sector) होने वाले इंजीनियरिंग प्लास्टिक (Engineering Plastics) और टेक्सटाइल इंडस्ट्री (Textile Industry) के लिए ज़रूरी PTA (PTA) की कम कीमत से मार्केट में एंड प्रोडक्ट्स (End Products in the Market by Price) की कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है। चूंकि भारत अपनी पेट्रोकेमिकल ज़रूरतों (India’s petrochemical needs) का लगभग 45% इम्पोर्ट करता है, इसलिए इस छूट से कॉस्ट-पुश इन्फ्लेशन को कंट्रोल (Controlling Cost-Push Inflation) करने में मदद मिलेगी।
एक्सपर्ट्स (Experts) का मानना है कि कस्टम ड्यूटी हटाने (Removal of customs duty) से न सिर्फ इंडस्ट्री का प्रॉफिट (Only the industry’s profit) बना रहेगा, बल्कि कंज्यूमर्स को इन्फ्लेशन के झटकों (Consumers facing the shocks of inflation) से भी बचाया जा सकेगा। सरकार ने साफ (The government has clarified) कर दिया है कि वह ग्लोबल हालात और इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil prices in the international market) पर कड़ी नज़र रख रही है। अगर सप्लाई चेन (If the supply chain…) में रुकावट और युद्ध जैसे हालात जून (War-like conditions in June) के बाद भी बने रहते हैं, तो इस राहत पीरियड को बढ़ाने पर विचार(Idea) किया जा सकता है। फिलहाल, इस फैसले से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (Domestic Manufacturing Sector Boosted by the Decision) में पॉजिटिव माहौल (Positive atmosphere) है और उम्मीद है कि प्रोडक्शन कॉस्ट (Production Cost) 20-25% तक कम हो जाएगी, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ कैंपेन को और मजबूती (Strength) मिलेगी।







