मध्य प्रदेश का इतिहास: पुरानी सभ्यता से मॉडर्न राज तक का सफ़र
भारत का दिल (heart of india) कहे जाने वाले मध्य प्रदेश का इतिहास (History of Madhya Pradesh) बहुत पुराना और समृद्ध (Prosperous) है। पुराने समय में, इस इलाके में अवंती, मालवा और विदिशा (Vidisha) जैसे ताकतवर प्रांत शामिल (powerful provinces included) थे। उज्जैन को शिक्षा, व्यापार और संस्कृति (Culture) का एक बड़ा सेंटर माना जाता था।
मौर्य और गुप्त राजवंशों के दौरान मध्य प्रदेश खूब फला-फूला। सम्राट अशोक (Emperor Ashoka) ने यहां बौद्ध धर्म का प्रचार (propagation of buddhism) किया और कई स्तूप बनवाने का आदेश दिया। बाद में, परमार और चंदेल शासकों ने कला (Chandela rulers developed art) और आर्किटेक्चर (architecture) को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, जिसका उदाहरण खजुराहो के मंदिर हैं।
मध्य युग (middle ages) के दौरान, इस इलाके पर दिल्ली सल्तनत और मुगलों का राज (rule of the mughals) था। बाद में, मराठों ने असर डाला और अपना राज मजबूत किया। 18वीं सदी में, यह इलाका ब्रिटिश राज के तहत आ गया।
आज़ादी के बाद, 1956 में राज्य के पुनर्गठन (Reorganization of the state) के तहत मध्य प्रदेश बनाया गया। बाद में, 2000 में छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य बना। आज, मध्य प्रदेश अपनी ऐतिहासिक विरासत (historical heritage) , सांस्कृतिक विविधता (cultural diversity) और प्राकृतिक संसाधनों (natural resources) के लिए जाना जाता है।







