मध्य प्रदेश के कई जिलों में फिर एक बार आसमान में छाये काले बादलो ने बढ़ाई किसानो की धडक़न, फिर बेमौसम बारिश के आसार
Madhya Pradesh: जिले में किसान बेमौसम बारिश (farmers unseasonal rain) और ओले गिरने से डरे(scared of hail) हुए हैं। दिन में छाए काले बादलों ने एक बार फिर किसानों की चिंता (Farmers worried again) बढ़ा दी है। अभी दो दिन पहले जिले में बारिश (rain in the district) हुई थी, जिससे फसलों को कोई खास नुकसान नहीं हुआ था। लेकिन सोमवार से एक बार फिर आसमान में बादल छाए (Clouds in the sky) हुए हैं, दिन भर बादल छाए (overcast) रहे, कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी (light drizzle) भी हुई। जिले में दलहन, तिलहन के साथ गेहूं की फसल (wheat crop) पक चुकी है। ऐसे में अगर तेज बारिश (heavy rain) या ओले गिरे तो किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान(Farmers suffer the most) होगा।
इस बार ठंड के मौसम में बारिश (Rain in the cold season) नहीं हुई और जब किसानों को पानी की जरूरत नहीं होती, तब मानसून बना रहता है। मौसम विभाग (meteorological department) के मुताबिक, दो दिन तक बादल ऐसे ही रहेंगे। गरज के साथ बारिश होने की संभावना (possibility of rain) है। पिछले एक हफ्ते से मौसम खराब है। बादलों की वजह से तापमान में गिरावट (drop in temperature) आई है। न्यूनतम तापमान (minimum temperature) 15 डिग्री सेल्सियस जबकि अधिकतम तापमान 33.3 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया।
इससे पहले न्यूनतम तापमान (minimum temperature) 17 डिग्री सेल्सियस और दिन का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। लेकिन जिले के आसपास बादल और बारिश के कारण पिछले चार दिनों से मौसम ठंडा (weather cold) है और धूप भी नरम है। लेकिन जैसे ही आसमान साफ होगा और धूप तेज (the sun shines) होगी तो निश्चित रूप से गर्मी बढ़ेगी और तापमान 40 डिग्री तक पहुंच जाएगा। दिन भर आसमान (full sky) में काले बादल छाए रहे, दोपहर में हल्की धूप निकली (light sunshine) और फिर से घने बादल छा गए। किसानों के खेतों में फसल खड़ी (crops standing in the fields) है, किसान अपनी मेहनत को लेकर चिंतित हैं। अगर ओलावृष्टि (hailstorm) हुई तो सब कुछ बर्बाद (Ruined) हो जाएगा।
फसलों (crops) के अलावा आम और अन्य फलों को भी नुकसान होगा। जब किसानों को अपनी फसलों के लिए पानी की जरूरत थी तब बारिश नहीं (no rain) हुई। इस बार ठंड के मौसम में एक भी बारिश नहीं (No rain in the winter season) हुई, जबकि ठंड में बारिश होती है लेकिन इस बार नहीं हुई। दरअसल, चना, मसूर और राई के साथ-साथ जवा की फसल पककर (after the harvest is ripe) कट चुकी है और किसान इसकी खेती में लगे हुए हैं। अगर बारिश होती है तो इसे नुकसान होगा। वहीं, कई जगहों पर गेहूं की फसल (wheat crop) भी काटी जा रही है। अगर फसल खलिहान में कटी हुई है तो ज्यादा नुकसान (more damage) नहीं होगा।







