RBI का बड़ा फैसला: डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए RBI का मास्टर प्लान, अब 10 हजार से ज़्यादा के ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन पर 1 घंटे का ‘होल्ड’, सेफ़ बैंकिंग के लिए नए नियम

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Friday, April 10, 2026 8:50 AM

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RBI का बड़ा फैसला: डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए RBI का मास्टर प्लान, अब 10 हजार से ज़्यादा के ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन पर 1 घंटे का ‘होल्ड’, सेफ़ बैंकिंग के लिए नए नियम

RBI का बड़ा फैसला:   ऑनलाइन और डिजिटल फ्रॉड (Digital Fraud) के बढ़ते मामलों को देखते(In view of the rising cases) हुए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) एक बड़ा प्रस्ताव लेकर आया है। RBI की तरफ़ से जारी डिस्कशन पेपर(Discussion Paper Released) के मुताबिक, ₹10,000 से ज़्यादा के डिजिटल पेमेंट (High-Value Digital Payments) पर अब एक घंटे का ‘कूलिंग पीरियड’ ज़रूरी किया जा सकता है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि साल 2025 में ही डिजिटल फ्रॉड (Digital Fraud) के करीब 28 लाख मामले दर्ज किए गए थे, जिसमें आम जनता को ₹22,900 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान हुआ था। चूंकि UPI (UPI) और IMPS (IMPS) जैसे सिस्टम में पैसा तुरंत ट्रांसफर (Instant Money Transfer within the System) हो जाता है, इसलिए पीड़ित के पास शिकायत (Complaint) करने और ट्रांज़ैक्शन रोकने का कोई समय नहीं (No time limit for stopping transactions.) बचता।

 

 

 

 

 

 

प्रस्तावित नियमों के तहत (Under the proposed rules) , अगर कोई व्यक्ति (If a person) किसी नए अकाउंट में ₹10,000 से ज़्यादा की रकम भेजता है, तो वह पैसा तुरंत क्रेडिट नहीं (Funds not credited immediately.) होगा, बल्कि एक घंटे के लिए ‘प्रोविजनली डेबिट’ (होल्ड) रहेगा। इस बीच, अगर यूज़र को लगता है कि उसके साथ धोखाधड़ी (Fraud) हुई है, तो वह उस पेमेंट को कैंसिल कर सकेगा। हालांकि, आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए छोटे पेमेंट और रेगुलर मर्चेंट पेमेंट को इस नियम से बाहर रखा गया है। इससे आम लोगों को ज़्यादा परेशानी नहीं (Not much trouble) होगी, जबकि बड़े फ्रॉड के मामलों में रिकवरी की संभावना काफी बढ़ (The likelihood of recovery has increased significantly.) जाएगी।

 

 

 

 

 

 

 

RBI ने सीनियर सिटिज़न्स (The RBI has [taken measures for] senior citizens.) और दिव्यांग लोगों के लिए और भी कड़े सुरक्षा स्टैंडर्ड सुझाए (Suggested Security Standards)  हैं। 70 साल से ज़्यादा उम्र के नागरिकों (Citizens) द्वारा ₹50,000 से ज़्यादा के पेमेंट पर ‘सेकेंडरी को-ऑथेंटिकेशन’ का नियम प्रस्तावित है, जिसके तहत किसी भरोसेमंद व्यक्ति की मंज़ूरी ज़रूरी (Approval from a trustworthy person is necessary.) हो सकती है। इसके अलावा, एक ‘किल स्विच’ का भी विचार है, जिससे ग्राहक इमरजेंसी में अपने अकाउंट के सभी डिजिटल चैनल तुरंत ब्लॉक (Customers can immediately block all digital channels associated with their account in case of an emergency.) कर सकेंगे। रिज़र्व बैंक ने इन प्रस्तावों पर आम जनता (The Reserve Bank [sought the views of] the general public on these proposals.0  और बैंकिंग एक्सपर्ट्स से 8 मई, 2026 तक सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद फ़ाइनल गाइडलाइंस जारी (Final Guidelines Issued) की जाएंगी।

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