सिंगरौली जिले का इकलौता खेल का मैदान राजमाता चुनकुमारी स्टेडियम गड्ढों और रेत में तब्दील, खिलाड़ी हो रहे घायल

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Saturday, April 4, 2026 5:22 AM

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सिंगरौली जिले का इकलौता खेल का मैदान राजमाता चुनकुमारी स्टेडियम गड्ढों और रेत में तब्दील, खिलाड़ी हो रहे घायल

नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क
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SINGRAULI NEWS:  जिला मुख्यालय बैढ़न (District Headquarters: Baidhan) में स्थित शहर का इकलौता (The only one in the city)  राजमाता चुनकुमारी स्टेडियम बदहाली की कगार (Stadium on the Brink of Ruin)  पर पहुंच गया है. आलम यह है कि स्टेडियम अव्यवस्था का शिकार (The stadium falls victim to mismanagement.) होने के साथ-साथ अपनी बदहाली पर आंसू बहा (Shed tears over the wretched plight.) रहा है.

 

 

 

 

 

 

 

 

दरअसल, जिला मुख्यालय में स्थित शहर का इकलौता (The city’s only one, situated at the district headquarters) स्टेडियम राजमाता चुनकुमारी स्टेडियम अपनी बदहाली पर आंसू बहा (The stadium wept over its dilapidated state.) रहा है. करीब एक दशक से इस स्टेडियम (This stadium—for a decade) की किसी ने सुध नहीं ली है. जबकि स्टेडियम के रखरखाव की जिम्मेदारी सिंगरौली नगर निगम (The Singrauli Municipal Corporation is responsible for the maintenance of the stadium.) की है. लेकिन एक दशक से भी ज्यादा समय से नगर निगम ने स्टेडियम पर कोई पैसा खर्च (The Municipal Corporation did not spend any money on the stadium.) नहीं किया है. नतीजतन, स्टेडियम का मैदान गड्ढों में तब्दील (Stadium Ground Turns into a Pothole-Ridden Mess) हो गया है. स्टेडियम के अंदर मैदान में इतने गड्ढे हैं कि उन्हें गिनने में ही समय लग जाएगा. एक दशक पहले जिस स्टेडियम में घास लगाई (Grass was planted in the stadium.) गई थी, उसमें से ज़्यादातर घास गायब है, जिससे खिलाड़ियों के लिए फुटबॉल और क्रिकेट जैसे आउटडोर गेम खेलना रिस्की(Playing outdoor games is risky.)  हो गया है। गौरतलब है कि इसी इकलौते स्टेडियम में रिपब्लिक और इंडिपेंडेंस डे के अलावा दूसरे सरकारी इवेंट होते हैं और टेंट लगाने के दौरान इतने गड्ढे हो जाते हैं कि बाद में उन्हें ठीक से भरा भी नहीं जाता और ये गड्ढे खेल प्रेमियों (Pit Game Enthusiasts) के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। यहां के खेल प्रेमियों का कहना है कि खेल के मैदान की सफाई नहीं होती और कई जगह नालियां खुली हैं। इससे दौड़ते समय नालियों में गिरने का डर (The fear of time slipping down the drains)  बना रहता है। पहले भी ऐसे कई हादसे हो चुके हैं। खिलाड़ियों ने इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम के अधिकारियों (Municipal Corporation officials) के साथ-साथ नेताओं का भी ध्यान खींचा है, लेकिन समस्या जस की तस है, बल्कि खेल के मैदान की हालत दिन-ब-दिन दयनीय होती जा रही है। यहां के खेल प्रेमियों ने MLA के साथ-साथ कलेक्टर, मेयर, ननि प्रेसिडेंट और ननि कमिश्नर का भी ध्यान खींचा है।

 

 

 

 

 

 

 

 

मैदान में ढेरों गड्ढे और रेत, खिलाड़ी परेशान

एक दशक पहले राजमाता चूनकुमारी स्टेडियम (Rajmata Chunkumari Stadium) की तारीफ पूरे जिले में होती थी। मैदान पर हरी घास और उसकी फुर्तीली व्यवस्था ने ज़्यादातर खेल प्रेमियों (The agile system has won over most sports enthusiasts.) को यहाँ खेलने के लिए उत्सुक कर दिया था, लेकिन धीरे-धीरे खेल का मैदान मिसमैनेजमेंट का शिकार होता जा रहा है। खिलाड़ियों का कहना है कि हरी घास गायब (Players say the green grass has disappeared.) है और मैदान रेत और गड्ढों से भरा है। इस वजह से, खिलाड़ी हर दिन दौड़ते समय दुर्घटनाग्रस्त (crashed) हो रहे हैं और उनके हाथ-पैर फ्रैक्चर (Fracture of the hands and feet) हो रहे हैं। इस तरह की घटनाएँ कई बार कई खिलाड़ियों के साथ हो चुकी हैं। लेकिन नगर निगम मैदान की हालत सुधारने की कोशिश (Municipal Corporation’s Attempt to Improve the Condition of the Ground) नहीं कर रहा है। इसके पीछे का कारण तो नगर निगम के अधिकारी (Municipal Corporation Officials) ही बता पाएंगे। लेकिन खेल के मैदान की दुर्दशा देखकर बच्चे अधिकारियों को कोसने (The children started cursing the officials.) में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

 

 

 

 

 

वे कहते हैं:-

हमें खेलने में बहुत परेशानी (A lot of trouble playing) होती है क्योंकि हर जगह धूल, रेत है। घास नहीं है, लगभग 10 साल से यही मैदान है। इसे देखने वाला कोई नहीं है और खेलते समय फिसलने (Slipping while playing) से हमारे कई हाथ-पैर फ्रैक्चर हो चुके हैं।

 

 

 

 

 

प्रेम मेहतर, खेल प्रेमी-बैढ़न

वे कहते हैं:-

खेलने में कई तरह की मुश्किलें (Difficulties) आती हैं। धूल और रेत के कण प्रदूषण के रूप (Sand particles as a form of pollution) में आंख, नाक और मुंह में जाते हैं और जब सिंचाई की जाती है, तो पानी कम या ज्यादा हो जाता है। हम कलेक्टर से अनुरोध (Request to the Collector) करते हैं कि जल्द ही मैदान को सुधारें। नेन्शी पांडे, खेल प्रेमी-बधान

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