SINGRAULI NEWS: गेहूं खरीदी में व्यापारियों का हित साध रही है सरकार, किसानों को एक एक दाने का समर्थन मूल्य मिले, किसान डिफाल्टर होने की कगार पर -अजय सिंह
नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क सिंगरौली
_________________________
SINGRAULI NEWS: पूर्व नेता प्रतिपक्ष (Former Leader of the Opposition) अजय सिंह ने मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी (Wheat Procurement in Madhya Pradesh) में बार-बार हो देरी को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण (The delay is extremely unfortunate.) , किसान-विरोधी (Anti-farmer) और असंवेदनशील (insensitive) बताया है। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही प्राकृतिक जोखिम (Natural Risks) , बढ़ती लागत, कर्ज के बोझ (The Burden of Debt) और मंडी की अनिश्चितताओं (The Uncertainties of the Market) से जूझ रहा है। ऐसे समय में सरकार द्वारा गेहूं खरीदी को टालते (Deferring wheat procurement by the government in a timely manner) रहना किसानों के घाव पर नमक छिड़कने (To rub salt in the wound) जैसा है।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष (Former Leader of the Opposition) अजय सिंह ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक (extremely worrying) है कि जब किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने की उम्मीद (Hoping to sell produce at the support price.) लगाए बैठा है, तब उसे मजबूरी में व्यापारियों (Traders, out of compulsion) को बहुत कम दाम पर गेहूं बेचना (Selling Wheat) पड़ रहा है। इससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान (Direct financial loss) हो रहा है और बैंक से कर्ज लेकर खेती (Farming with a Bank Loan) करने वाले अनेक किसान डिफाल्टर होने की कगार (Many farmers on the verge of default.) पर पहुंच गये हैं।
अजय सिंह ने कहा कि सरकार बारदाने (Government Gunny Bags) की कमी का बहाना बनाकर खरीदी में विलंब (Delay in procurement under a pretext) कर रही है, जबकि खुले बाजार में और व्यापारियों के पास पर्याप्त बारदाना उपलब्ध (Traders have adequate gunny bags available.) है। यदि व्यापारी बड़े पैमाने (Large-scale traders) पर खरीदी कर सकते हैं, तो सरकार किसानों से समर्थन मूल्य(The government procures from farmers at the support price.) पर गेहूं क्यों नहीं खरीद सकती? यह प्रश्न सरकार की मंशा पर गंभीर संदेह पैदा (The question raises serious doubts regarding the government’s intentions.) करता है। राजस्थान सहित कई राज्यों में गेहूं खरीदी (Wheat procurement is underway in several states, including Rajasthan.) पहले ही शुरू हो चुकी है, लेकिन मध्य प्रदेश में किसानों को लगातार इंतजार (Farmers in Madhya Pradesh Face a Continuous Wait) कराया जा रहा है। इससे यह आशंका मजबूत होती है कि व्यापारियों को लाभ (Benefits for Traders) पहुंचाने के लिए ही सरकार खरीदी में देर (Delay in Government Procurement) कर रही है।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग (Demand from the State Government) की है कि वह बहानेबाजी छोड़कर तत्काल (Stop making excuses—immediately.) गेहूं खरीदी शुरू करे। किसानों से एक-एक दाना समर्थन मूल्य पर खरीदा (Purchased at the support price) जाए, खरीदी केंद्रों की संख्या बढ़ाई (The number of centers has been increased.) जाए, बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था (Adequate arrangement of gunny bags) की जाए और भुगतान की प्रक्रिया भी समयबद्ध रूप से सुनिश्चित (The payment process is also ensured to be time-bound.) की जाए।पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसानों के साथ यह अन्याय अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सरकार को तुरंत प्रभाव से निर्णय लेकर खरीदी प्रारंभ (The government took a decision with immediate effect and commenced procurement.) करनी चाहिए, अन्यथा यह माना जाएगा कि प्रदेश की भाजपा सरकार किसानों के हितों (The BJP government [prioritizes] the interests of farmers.) की नहीं, व्यापारिक हितों की रक्षा कर रही है।







