SINGRAULI NEWS: करोड़ों रूपये बच्चों के सहायक पोषण आहार प्रस्ताव पर 9 से 10 करोड़ खर्च की तैयारी, सड़क, पानी और बिजली संकट के बीच प्राथमिकता पर उठे बड़े सवाल?
नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क सिंगरौली
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SINGRAULI NEWS: जिले के शासकीय विद्यालयों (Government Schools) में कक्षा पहली से पांचवीं तक अध्ययनरत (Studying in grades 1 through) करीब 25 हजार नौनिहाल छात्र-छात्राओं को सहायक पौष्टिक पोषण आहार उपलब्ध (Supplementary Nutritious Diet Provided to Students) कराने की प्रस्तावित योजना (Proposed Plan) को लेकर जिला मुख्यालय में हलचल तेज (Activity Intensifies at Headquarters) हो गई है। सूत्रों के अनुसार इस योजना के लिए करीब (Approximately for the plan) 9 से 10 करोड़ रुपये की राशि एनसीएल के सीएसआर मद से खर्च (Amount spent from NCL’s CSR fund) किए जाने की तैयारी चल (Preparations are underway.) रही है। हालांकि महत्वपूर्ण बात (However, the important point is…) यह है कि अभी तक यह राशि खर्च नहीं हुई (The amount was not spent.) है, बल्कि फिलहाल इस प्रस्ताव को लेकर जिला प्रशासन स्तर पर चर्चा (Discussions at the district administration level regarding the proposal.) और मंथन जारी (Deliberations Continue) है।
जानकारी के मुताबिक (According to information) इंदौर की एक एनजीओ, जो सहायक पोषण आहार निर्माण (nutritional supplements formulation) और आपूर्ति से जुड़ी बताई जा (Reported to be related to supply) रही है, उसके प्रतिनिधियों की जिला मुख्यालय (District Headquarters of Representatives) और कलेक्टोरेट भवन में लगातार भागदौड़ देखी (Constant hustle and bustle were observed at the Collectorate building.) जा रही है। कलेक्टोरेट में इस प्रस्ताव को लेकर कई स्तरों (This proposal was discussed at multiple levels within the Collectorate.) पर चर्चाएं चल (Discussions are underway.) रही हैं और योजना को अंतिम रूप देने की कोशिश (Attempt to finalize the plan) की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि देवसर, चितरंगी और बैढ़न विकासखंड के स्कूलों में इस योजना को लागू (Implementing this scheme in schools within the Baidhan Development Block.) करने की रूपरेखा पर विचार किया जा रहा है और निर्धारित जन शिक्षा केन्द्र के अधीन आने वाले विद्यालयों को चिन्हित (Identified Schools) करने की कवायदे की जा रही हैं। सबसे गंभीर (The most serious) बात यह है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी खुलकर जवाब (Responsible officials provide frank answers.) देने से कतरा रहे हैं। अभी तक न तो कोई आधिकारिक प्रेस नोट जारी (No official press note issued.) हुआ है और न ही योजना (Plan) की प्रक्रिया, गुणवत्ता जांच (quality inspection) और निगरानी तंत्र को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने (Clear information regarding the monitoring mechanism has emerged.) आई है।
फिलहाल प्रस्ताव (Current Proposal) और चर्चाओं का दौर जारी (The round of discussions continues.) है, लेकिन जिले में यह सवाल तेजी से उठ (Questions arose rapidly. ) रहा है कि क्या करोड़ों रुपये का यह प्रस्ताव वास्तव में बच्चों (Is this multi-crore proposal truly for the children?) के हित में है या फिर फण्ड खर्च (Fund Expenditure) करने की नई कवायद भर (Merely a new exercise) है। हालांकि यहां बताते चले कि नीति आयोग के तहत गर्भवती महिलाओं का हेमोग्लोबिंग बढ़ाने (Increasing Hemoglobin Levels in Pregnant Women under NITI Aayog) के लिए एनसीएल के द्वारा चना-गुण का वितरण (Distribution of Gram and Jaggery by NCL) भी किया गया। आरोप है कि महिलाओं को हेमोग्लोबिंग भले (Even if women have adequate hemoglobin levels…) ही ना बढ़ा हो, लेकिन कई अधिकारियों के वजन बढ़ (Increase in the weight of officials) गये थे। इसके पीछे असली वजह जगजाहिर है। फिलहाल स्कूली बच्चों को पोष्टिक अतिरिक्त आहार (Currently: Nutritious Supplementary Diet for Schoolchildren) दिये जाने के प्रस्ताव को लेकर इन दिनों जिला मुख्यालय बैढ़न (District Headquarters: Baidhan) में हलचले तेज हैं। चर्चाएं इस बात की है कि आखिर एनजीओ पर इतनी मेहरवानी क्यों (Why such benevolence towards NGOs?) की जा रही है, इसके पीछे मकसद क्या है। इसे तो जिले के आलाधिकारी (Senior District Officials) ही बता पाएंगे। लेकिन एनजीओ के माध्यम से कार्य कराया जाना बात चर्चाओं (Discussions regarding the execution of work through NGOs.) में जरूर होगी।
जिले के कई टोले अभी भी सड़क विहीन
हालांकि इस प्रस्ताव ने जिले में नई बहस को जन्म (The proposal sparked a new debate in the district.) दे दिया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों (Local residents and social organizations) का कहना है कि इस समय जिले की सबसे बड़ी जरूरत बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण आहार नहीं (Not a Supplementary Nutritional Diet) , बल्कि बुनियादी सुविधाओं (Basic amenities) का विकास है। विशेषकर सरई, माड़ा, देवसर और चितरंगी विकासखंड के दूरस्थ अंचल (The remote regions of Chitrangi Development Block) , खासकर बगदरा अभ्यारण्य क्षेत्र के कई गांव और टोले आज भी सड़क विहीन (Hamlets remain roadless even today.) हैं। बरसात के दिनों में इन क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क एवं पेयजल पर विशेष जोर देने की मांग
इसके साथ ही गर्मी के मौसम में इन इलाकों में पानी की भारी किल्लत बनी (During the summer season, there was a severe water shortage in these areas.) रहती है। कई गांवों में बिजली की लाइनें (Electricity lines in villages) होने के बावजूद आपूर्ति नियमित (Regular Supply) नहीं रहती। ग्रामीणों (Villagers) का कहना है कि यदि यही प्रस्तावित राशि सड़क (Proposed amount for roads) , पेयजल (Drinking Water) और बिजली व्यवस्था को मजबूत (Strengthening the Power System) करने में लगाई जाए, तो उसका सीधा लाभ हजारों परिवारों को मिलेगा (Thousands of families will receive direct benefits.) । योजना की व्यवहारिकता को लेकर भी सवाल उठ (Questions were also raised regarding the feasibility of the scheme.) रहे हैं। विद्यालयों में पहले से मध्यान्ह भोजन योजना संचालित (Mid-Day Meal Scheme Operational) है, ऐसे में अतिरिक्त पोषण आहार वितरण का समय (Schedule for the Distribution of Supplementary Nutritional Food) कैसे तय होगा, यह स्पष्ट नहीं है। कहीं ऐसा न हो कि योजना केवल कागजों तक सीमित रह जाए (The plan remains confined merely to paper.) और वितरण का लेखा-जोखा भी संदिग्ध (The records of distribution are also suspect.) बने। पूर्व में इस तरह की कई कार्य किये भी जा चुके हैं, जहां लगातार आरोपो का दौर चला (A continuous barrage of allegations ensued.) है। नीति आयोग के तहत गर्भवती महिलाओं को चना-गुण वितरण (Distribution of Gram and Jaggery to Pregnant Women under NITI Aayog) में हुई अनियमितताएं की चर्चा आज भी होती (Irregularities are still discussed today.) है।







