Singrauli News: सालभर में कॉलेज भवन में आई दरारें

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Singrauli News: मामला शासकीय डिग्री कॉलेज देवसर भवन का 2022-23 में हुआ था लोकार्पण, 9 करोड़ रूपये से अधिक धन राशि थी मंजूर

सिंगरौली 24 फरवरी। ब्लाक मुख्यालय देवसर में जिला खनिज प्रतिष्ठान से तकरीबन 9 करोड़ रूपये की लागत से शासकीय डिग्री कॉलेज भवन का निर्माणकार्य के लिए मंजूरी मिली थी। जिसका लोकार्पण भी हुआ। लेकिन 1 साल के अन्दर ही करोड़ रूपये की इस भवन में जगह-जगह दरारें पडऩे लगी है।Singrauli News

देवसर मेंं कॉलेज भवन निर्माण के लिए काफी लम्बे अर्से से मांग की जा रही थी। वर्ष 2020 में जिला खनिज प्रतिष्ठान सिंगरौली से शासकीय महाविद्यालय भवन के लिए तकरीबन जिला प्रशासन ने तकरीबन 9 करोड़ रूपये की धन राशि मंजूर किया था। उक्त भवन का 7 मार्च 2020 को तत्कालीन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री कमलेश्वर पटेल के मुख्य आतिथ्य, सीधी सांसद रीती पाठक के अध्यक्षता एवं जिला पंचायत अध्यक्ष अजय कुमार पाठक के विशिष्ट आतिथ्य में शिलान्यास हुआ था। किं तु कोरोना काल के समय कार्य पर ग्रहण लगा था। जब कोरोना काल का दौर समाप्त हुआ महाविद्यालय भवन के निर्माणकार्य शुरू होते ही भवन के गुणवत्ता पर सवाल उठाये जाने लगे थे। स्थानीय कई लोग क्रियान्वयन एजेंसी पीआईयू एवं संविदाकार पर गुणवत्ता पर प्रश्र चिन्ह लगाते हुये विभागीय जिम्मेदार के यहां शिकायते भी किये।

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इसके बावजूद जिले के तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों ने लोगों के शिकायतों को नजरअन्दाज कर दिया था। इतना ही नही भवन का एक हिस्से का दिवाल भी भरभरा कर गिर गई थी। इसकी भी शिकायत हुई लेकिन अधिकारियों ने इसे भी नजरअन्दाज कर दिया था और अब जब कॉलेज भवन का लोकार्पण हुआ और एक साल के अन्दर ही उक्त भवन के दिवाल जगह-जगह दरारें पड़ गई, तब महाविद्यालय में अध्यनरत्न छात्रों ने भी भवन के कार्य के गुणवत्ता पर कई तरह के सवाल खड़ा किया। आरोप है कि कॉलेज भवन के निर्माण कार्य में व्यापक तौर पर अनियमितता कर गुणवत्ता की अनदेखी की गई है। साथ ही भवन को देखने के बाद ऐसा प्रतित होता है कि इसमें जम कर कमीशनखोरी की गई है। जब एक साल के अन्दर ही करोड़ो रूपये की उक्त भवन में दरारें पडऩे लगी है तो ऐसे में उक्त भवन कब तक टिकाउ रहेगा। बस इसी से सहज अन्दाजा लगा जा सकता है। फिलहाल शासकीय महाविद्यालय देवसर के करोड़ो की धन राशि से बने भवन की एक साल में ही गुणवत्ता की पोल खोलने पर स्थानीय लोगो ने क्रियान्वयन एजेंसी पीआईयू एवं संविदाकार पर तरह-तरह की उंगली उठाते हुये उक्त मामले की जांच कराने की मांग की है।

दरारों को छुपाने स्टील प्लेट का सहारा

करोड़ों रूपये के लागत से बने महाविद्यालय के भवन में जब बड़े-बड़े दरारें पड़ गई थी । उस पर लीपापोती करने क रने के लिए क्रियान्वयन एजेंसी पीआईयू ने नया तरकीब खोजा। भवन में जहा-जहां लम्बी हाईट में दरारें दिखी वहां-वहां पर स्टील की प्लेटे लगा दी गई। ताकी सुन्दरता भी दिखी और दरारों पर पर्दा भी डाला जा सके। पीआइयू का यह तरकीब कहा छुपने वाली थी। भवन की दिवाले ही इस बात की बया खुद कर रही है कि भवन का निर्माण कार्य कमीशनखोरी के भेट चढ़ गया है।

वर्ष 2022 में दिवाल की टूटने की हुई थी शिकायत

जानकारी के मुताबिक, सरकारी कॉलेज भवन के निर्माण कार्य के दौरान दीवार गिरने की जानकारी जब स्थानीय लोगों को हुई तो इसकी शिकायत कार्यदायी संस्था पीआईयू के साथ-साथ जिला प्रशासन से भी की गई और यह शिकायत की गई. अगस्त माह. 2022 में किया गया था. लेकिन आरोप है कि पीआईयू के तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी ने शिकायत को टेबल के नीचे छिपा दिया ताकि किसी को मामला नजर न आए और वे अपने मकसद में कामयाब हो गए. उसे पता चल जाएगा कि वे ऐसा क्यों कर रहे थे.

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Ramesh Kumar
Author: Ramesh Kumar

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