सिस्टम फेलियर: NH-39 13 साल बाद भी अधूरा, अब टेक्निकल खराबी के कारण तोड़ा जा रहा नौड़िया ओवरब्रिज

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Wednesday, April 1, 2026 5:53 AM

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सिस्टम फेलियर: NH-39 13 साल बाद भी अधूरा, अब टेक्निकल खराबी के कारण तोड़ा जा रहा नौड़िया ओवरब्रिज

SINGRAULI NEWS:    सीधी-सिंगरौली नेशनल हाईवे-39 (Sidhi-Singrauli National Highway-39) पिछले 13 सालों से बन रहा है और अब एक बार फिर यह प्रोजेक्ट गंभीर सवालों के घेरे (Project Under a Cloud of Serious Questions) में आ गया है। मार्च में फोर-लेन सड़क के लिए हुए तीसरे टेंडर (Third Tender for Four-Lane Road Floated in Marc) के बीच गोरबी के पास नौड़िया में ओवरब्रिज (Overbridge at Naudiya, near Gorbi) के एक हिस्से को तोड़ने का काम शुरू हो गया है। लाखों रुपये की लागत से बने इस ओवरब्रिज को अब तोड़कर (Now, after demolishing the overbridge…) फिर से बनाया गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

स्थानीय लोगों (Local people) का कहना है कि यह ओवरब्रिज शुरू से ही टेक्निकल खामियों (The overbridge has been plagued by technical flaws right from the start.) से  ग्रस्त था। सबसे बड़ी समस्या इसका टर्निंग (Turning) बताया जा रहा है। यहां का टर्न इस तरह से डिजाइन (The turn is designed in this manner.)  किया गया था कि बड़े और भारी वाहनों का आना-जाना मुश्किल (Movement of heavy vehicles is difficult.) हो सकता था। लंबे समय से इस रूट पर वाहन चला रहे ड्राइवरों ने भी कई बार इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया था, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया (The responsible department did not take this seriously.) । अब जब पुल का एक हिस्सा तोड़ा जा रहा है, तो यह सवाल और भी गंभीर हो गया है कि इतनी बड़ी कमी इतने सालों तक कैसे नज़र नहीं आई। जानकारी के मुताबिक, फरवरी में वाराणसी, दिल्ली और दूसरे शहरों से सड़क बनाने वाले टेक्नीशियन (Road-building technicians from the cities) , इंजीनियर और एक्सपर्ट की टीम यहां आई थी। टीम ने फोर-लेन सड़क और बन रहे नौढ़िया ओवरब्रिज का बारीकी से मुआयना (Detailed Inspection of the Overbridge) किया। मुआयने के दौरान कई टेक्निकल कमियां (Technical Flaws) सामने आईं, जिनमें ओवरब्रिज का टर्निंग (The Overbridge Turn)  और स्ट्रक्चर मुख्य थे। एक्सपर्ट की रिपोर्ट के बाद पुल का एक हिस्सा तोड़ने का फैसला (Decision to Divide the Share) किया गया और पिछले एक पखवाड़े से बन रहे ओवरब्रिज का एक हिस्सा तोड़ा जा रहा है और सरिया 25 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि केस के समय इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। अगर तीसरी बार टेंडर नहीं होता तो शायद ओवरब्रिज (Perhaps an overbridge) बन चुका होता। अब स्थानीय गांव वाले MPRDC के इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई कर रकम वसूलने की मांग कर रहे हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

MPRDC के पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी फंड से लाखों रुपये की लागत से ओवरब्रिज (Overbridge) बनाया गया था। हालांकि वह अभी बन रहा है। अब उसी ब्रिज को गिराने के लिए फिर से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी है। लोगों ने पूरे मामले की हाई-लेवल जांच और उस समय तैनात अधिकारियों, इंजीनियरों (Deployed officers and engineers) और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय (Contractors’ Responsibility Established) करने की मांग की है। सीधी-सिंगरौली NH-39 इस इलाके के सबसे महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट्स (Important Road Projects) में से एक है, लेकिन 13 साल से अधूरा कंस्ट्रक्शन और अब ओवरब्रिज की तकनीकी खामियों ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल (Technical flaws in the overbridge have raised serious questions about the entire system.) खड़े कर दिए हैं। आम जनता की मांग है कि कंस्ट्रक्शन का काम पूरा (Construction work completed.) करना ही काफी नहीं है, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा (Such negligence in the future… again.) न हो सके।

 

 

 

 

 

 

 

इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

सबसे बड़ा सवाल अब MPRDC के उन अधिकारियों (Those officials) और इंजीनियरों पर मंडरा रहा है जो पिछले 12 से 13 सालों से इस प्रोजेक्ट से जुड़े थे। अगर कंस्ट्रक्शन एस्टीमेट (Construction Estimate) के हिसाब से नहीं हुआ था, तो उस समय तैनात इंजीनियर (Deployed Engineer) और सब-इंजीनियर ने उसे रोका क्यों नहीं? अगर कॉन्ट्रैक्टर ने मनमाने ढंग से गलत कंस्ट्रक्शन किया था, तो क्वालिटी टेस्टिंग (Quality Testing0 और टेक्निकल अप्रूवल अथॉरिटीज़ (Technical Approval Authorities) ने उस पर एतराज़ क्यों नहीं किया?

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