मिडिल ईस्ट में युद्ध से नैचुरल गैस का संकट गहराया, भारत और साउथ कोरिया ने बिजली बनाने के लिए कोयले का कोटा बढ़ाया, एनर्जी सिक्योरिटी के लिए खतरा मंडरा रहा है

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Tuesday, March 24, 2026 9:42 AM

मिडिल ईस्ट में युद्ध से नैचुरल गैस का संकट गहराया, भारत और साउथ कोरिया ने बिजली बनाने के लिए कोयले का कोटा बढ़ाया, एनर्जी सिक्योरिटी के लिए खतरा मंडरा रहा है

ईरान, इज़राइल और US के बीच बढ़ते मिलिट्री तनाव (rising military tensions) ने एशियाई एनर्जी मार्केट (Asian Energy Market) में उथल-पुथल मचा (created an uproar) दी है। युद्ध (war) की स्थिति ने ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज’ जैसे ज़रूरी समुद्री रास्तों को असुरक्षित (making sea routes unsafe) बना दिया है, जहाँ से एशिया की लगभग 20% नैचुरल गैस (natural gas)  (LNG) और तेल की सप्लाई (oil supply) होती है। ग्लोबल संकट ने गैस सप्लाई (Global crisis has affected gas supply) रोक दी है, जिससे भारत, साउथ कोरिया (south korea) और वियतनाम जैसे देशों को बिजली संकट (electricity crisis in countries) का सामना करना पड़ रहा है। मजबूर होकर, इन देशों ने बिना किसी रुकावट के घरेलू (domestic) और इंडस्ट्रियल बिजली की ज़रूरतों (industrial power needs)  को पूरा करने के लिए इको-फ्रेंडली गैस (Eco-friendly gas) के बजाय फिर से ‘कोयले’ पर अपनी निर्भरता (dependency)  बढ़ा दी है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

भारत, जो दुनिया (World) का दूसरा सबसे बड़ा कोयला कंज्यूमर (Coal Consumer) है, ने भीषण गर्मी (extreme heat) और बिजली (Electricity) की बढ़ती मांग को देखते हुए कोयला प्रोडक्शन (coal production) और इसके इस्तेमाल का कोटा तेज़ी से बढ़ा दिया है। साउथ कोरिया ने भी ईस्ट में कोयले (South Korea also has coal in the East)  से चलने वाले पावर प्लांट पर लगी रोक हटा दी है, जबकि वियतनाम और थाईलैंड अपने पुराने प्लांट को पूरी कैपेसिटी (Capacity) पर चलाने की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच, दुनिया के सबसे बड़े कोयला एक्सपोर्टर इंडोनेशिया (Indonesia, a coal exporter)  ने अपने स्टॉक को इंटरनेशनल मार्केट (stock to international market) में बेचने के बजाय घरेलू इस्तेमाल के लिए सुरक्षित (Safe for home use) करना शुरू कर दिया है। इस जियोपॉलिटिकल अस्थिरता (Geopolitical instability) की वजह से एशियाई मार्केट (Asian Market) में कोयले की कीमतों (coal prices) में 13% तक की बढ़ोतरी हुई है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

एनर्जी एक्सपर्ट्स ने चेतावनी (Energy experts warn) दी है कि कोयले (coal) की तरफ यह वापसी एक ‘टेम्पररी सॉल्यूशन’ हो सकती है, लेकिन इसके लंबे समय के नतीजे बहुत चिंताजनक (The results are very worrying) होंगे। कोयले के ज़्यादा जलने से कार्बन एमिशन (Carbon emissions from increased coal burning) बढ़ेगा, जिससे एशिया के प्रदूषण कम (less pollution in asia) करने के लक्ष्यों को बड़ा झटका लगेगा। ‘पावरिंग पास्ट कोल अलायंस’ की एक्सपर्ट जूलिया स्कोर्प्स्का (Expert Julia Skorupska) के मुताबिक, फॉसिल फ्यूल पर यह निर्भरता भविष्य (This dependence on fossil fuels will be a threat to the future) में और भी बड़े आर्थिक और हेल्थ संकटों (health crises) की नींव रख रही है। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि यह संकट एक चेतावनी है कि देशों को अब इम्पोर्टेड गैस (imported gas) या कोयले के बजाय सोलर और विंड पावर जैसे ‘रिन्यूएबल एनर्जी’ सोर्स की ओर तेज़ी (speed) से बढ़ना चाहिए।

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