मंदिरों में दर्शन का इंतज़ाम करना एडमिनिस्ट्रेटिव मामला है, यह कलेक्टर का काम है कि वह तय करे कि मंदिरों में किसे एंट्री मिलेगी:-सुप्रीम कोर्ट
जनवरी 2026 में, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह (The sanctum sanctorum of the Mahakaleshwar Temple in Ujjain) में VIP दर्शन (VIP Darshan) को चुनौती (challenge) देने वाली एक याचिका भी खारिज (petition also rejected) कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि यह कलेक्टर (Collector) और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन पर निर्भर (Depend on local administration) है कि वे तय करें कि कौन भक्त है और किसे एंट्री मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि मंदिरों में दर्शन का इंतज़ाम (arrangement for darshan) करना एडमिनिस्ट्रेटिव (Administrative) मामला है। यह राज्य सरकारों (state governments) और मंदिर मैनेजमेंट का अधिकार क्षेत्र (jurisdiction of temple management) है, कोर्ट का नहीं। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (The Supreme Court directed the Madhya Pradesh High Court) के पुराने फैसले को बरकरार रखा था जिसमें कहा गया था कि ‘VIP’ की कोई कानूनी परिभाषा (legal definition) नहीं है और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन दर्शन (local administration philosophy) के आसान इंतज़ाम के लिए फैसले लेने के लिए स्वतंत्र (free to make decisions) है। याचिकाकर्ता (petitioner) (दर्पण अवस्थी) ने तर्क दिया था कि प्रभावशाली लोगों को गर्भगृह (Sanctum sanctorum for influential people) में जाने देना आर्टिकल (Article) 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन (Violation) है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसे पॉलिसी मामलों में दखल देना कोर्ट (Court interference in policy matters) का काम नहीं है।







