ईरान युद्ध के 27वें दिन टकराव चरम पर, US और तेहरान सीज़फ़ायर प्रस्तावों के लिए मुकाबला कर रहे हैं, ईरान ने दुश्मन देशों को कड़ी चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर संप्रभुता की मांग की है।
ईरान और इज़राइल के बीच चल रहा भयंकर युद्ध (Fierce Battle) आज 27वें दिन में प्रवेश कर गया है। अमेरिका ने शांति बहाल (America Restores Peace) करने के लिए 15-पॉइंट का सीज़फ़ायर प्रस्ताव (Ceasefire Proposal) दिया है, लेकिन इसके जवाब में ईरान ने अपना कड़ा प्रस्ताव जारी (Strict Proposal Issued) किया है। ईरान ने युद्ध के हरजान और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण (Strategically important) ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर पूरी संप्रभुता की अपनी मांग साफ तौर पर (Demand clearly) रखी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस समय पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देशों के साथ संभावित समझौते (Potential Agreements with Countries) के लिए बातचीत कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर, ईरानी सेना ने U.S. के दावों का मज़ाक उड़ाकर स्थिति (The situation after making fun) को और भी खतरनाक बना (Became dangerous) दिया है।
डिप्लोमैटिक कोशिशों (Diplomatic efforts) के बीच ईरान और लेबनान पर इज़राइल के हमले लगातार जारी हैं। इज़राइली रक्षा मंत्री के अनुसार (According to the Israeli Defense Minister) , ईरान पर अब तक 15,000 से ज़्यादा बम गिराए जा चुके हैं, जिससे लेबनान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,094 हो गई है। जवाब में, ईरान और उसके सहयोगी गुटों (Allied factions) ने उत्तरी इज़राइल को मिसाइल (Missile) और ड्रोन हमलों का निशाना (Target of Drone Attacks) बनाया है। इज़राइल ने साफ़ कर दिया है कि वह अभी किसी भी ऐसी बातचीत का हिस्सा नहीं है जो उसके सैन्य लक्ष्यों में रुकावट डाले। इस भारी गोलाबारी ने मिडिल ईस्ट में मानवीय संकट (Heavy Shelling Triggers Humanitarian Crisis in the Middle East) को और गहरा कर दिया है।
युद्ध (war) के और बढ़ने की आशंका के बीच US मिडिल ईस्ट (Middle East) में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, 82वें एयरबोर्न डिवीज़न (Airborne Division) के 1,000 सैनिकों के साथ दो मरीन यूनिट तैनात की जा रही हैं, जिससे इस इलाके में हज़ारों नाविक और मरीन कमांडो जुड़ रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इन कदमों को भविष्य की कार्रवाइयों (Future Actions) के लिए उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा छूट देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान की अगुवाई में दोस्त देश दोनों पक्षों को बातचीत की टेबल पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं (No signs of tension easing.) हैं।







