US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का ‘टैरिफ बम’, विदेशी दवाओं पर 100 परसेंट टैक्स, भारत की फार्मा इंडस्ट्री में उथल-पुथल, रीशोरिंग के लिए 120 दिन का समय

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Friday, April 3, 2026 11:10 AM

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US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का ‘टैरिफ बम’, विदेशी दवाओं पर 100 परसेंट टैक्स, भारत की फार्मा इंडस्ट्री में उथल-पुथल, रीशोरिंग के लिए 120 दिन का समय

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रेड एजेंडे को धार (Sharpening the Trade Agenda) देते हुए विदेशी दवाओं और मेटल्स (Metals) (धातुओं) पर नए और कड़े टैरिफ लगाने का ऑर्डर जारी (Order Issued to Impose Strict Tariffs)  किया है। इस नए ऑर्डर के तहत, US के बाहर बनी पेटेंटेड दवाओं (Patented medicines) पर अब 100 परसेंट टैरिफ लगेगा। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन (Trump Administration) का यह कदम ‘लिबरेशन डे’ की पहली एनिवर्सरी (Anniversary) पर आया है, जिसका मुख्य मकसद विदेशी कंपनियों (The primary objective: foreign companies) को US में अपनी फैक्ट्रियां (Factories) लगाने के लिए मजबूर करना है। प्रेसिडेंट ने साफ किया है कि जो कंपनियां प्रोडक्शन (Company Production) वापस US लाने (रीशोरिंग) का वादा करेंगी, उनके लिए यह टैरिफ घटाकर 20 परसेंट कर दिया जाएगा, जबकि बड़ी कंपनियों को यह बदलाव करने के लिए 120 दिन का समय दिया गया है।

 

 

 

 

 

डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के इस फैसले से भारत की फार्मा इंडस्ट्री (India’s Pharmaceutical Industry) को बड़ा झटका लगने की उम्मीद (Major setback expected)  है। भारत, जिसे ‘दुनिया का फार्मा हब’ कहा जाता है, बड़े पैमाने पर अमेरिका को फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट (Pharmaceutical Exports to the US) करता है। 100 परसेंट टैरिफ लागू होने के बाद, US में भारतीय दवाओं की कीमतें आसमान छू (Prices of Indian medicines skyrocket in the US.) जाएंगी, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स की कॉम्पिटिटिवनेस कम (Indian Exporters’ Competitiveness Declines) हो जाएगी। हालांकि, EU, जापान और साउथ कोरिया जैसे देश अभी अपने मौजूदा ट्रेड एग्रीमेंट की वजह से इस भारी टैरिफ (This heavy tariff due to the trade agreement) से बाहर हैं। भारत के लिए अब चुनौती यह है कि वह US के साथ “मोस्ट फेवर्ड नेशन” एग्रीमेंट करे या अपनी कंपनियों को वहां इन्वेस्ट (Companies investing there) करने के लिए बढ़ावा दे।

 

 

 

 

 

 

फार्मास्यूटिकल्स (Pharmaceuticals) के अलावा, ट्रंप ने स्टील, एल्युमीनियम (Aluminum) और कॉपर से बने तैयार प्रोडक्ट्स पर भी 25 परसेंट टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इससे पहले, U.S. सुप्रीम कोर्ट ने ग्लोबल टैरिफ पर रोक लगा दी थी, लेकिन ट्रंप ने अलग-अलग कानूनी अथॉरिटी का इस्तेमाल (Exercise of Legal Authority) करके टैरिफ को फिर से लगाने की कोशिश की है। इस फैसले से न सिर्फ फार्मा सेक्टर में, बल्कि ऑटोमोबाइल और कंस्ट्रक्शन जैसी इंडस्ट्रीज़ (Industries such as construction) में भी कच्चे माल की कीमतें बढ़ने की संभावना है। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि ट्रंप की यह “अमेरिका फर्स्ट” पॉलिसी ग्लोबल सप्लाई चेन को पूरी तरह से बदल सकती है, जिससे आने वाले समय में कंज्यूमर्स के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स (Electronic Products for Consumers Over Time) और हेल्थकेयर (Healthcare) के और महंगे होने का खतरा (Risk of becoming expensive)  बढ़ जाएगा।

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