Singrauli Breaking News: नगर निगम खुद प्यासा, तो जनता की प्यास कैसे बुझाएगा?
नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क सिंगरौली
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Singrauli Breaking News: जिस नगर निगम पर पूरे शहर को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी (The responsibility of providing clean drinking water to the city.) है, आज वही नगर निगम कार्यालय खुद पानी के लिए तरसता नजर (Municipal Corporation office itself seen struggling for water.) आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में आने वाले नागरिकों (Citizens arriving in the thousands every day) और कर्मचारियों की प्यास बुझाने के लिए मात्र 5 से 10 लीटर क्षमता का वाटर कूलर (Capacity water cooler) लगा है, और वह भी पानी नहीं दे रहा।
सवाल यह है कि जब नगर निगम अपने ही कार्यालय में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं कर पा रहा (Unable to arrange for clean drinking water in the office.) , तो शहर की जनता तक किस गुणवत्ता का पानी पहुंच रहा (What is the quality of water reaching the city’s residents?) होगा? यह किसी से छिपा नहीं है कि कई क्षेत्रों से गंदा और दूषित पानी सप्लाई होने की शिकायतें लगातार सामने (Complaints regarding the supply of contaminated water continue to surface.) आती रही हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता (It also affects people’s health.) है।
करोड़ों रुपये नल-जल योजनाओं (Tap-water schemes) , पेयजल व्यवस्थाओं (Drinking water arrangements) और जनसुविधाओं के नाम पर खर्च (Expenditure on public amenities) किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर (The ground reality tells a different story.) रही है। नगर निगम की पहचान विकास से अधिक बदहाल व्यवस्थाओं (More bad systems than development) , अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ती जा रही है।
फिलहाल हम केवल जमीनी हकीकत जनता के सामने (The ground reality before the public) रख रहे हैं। जिस दिन सरकारी फाइलों, भुगतान, टेंडरों और योजनाओं के दस्तावेज सामने आएंगे, उस दिन कई बड़े खुलासे (Several major revelations of the day) होंगे। तब यह भी सामने आएगा कि नगर निगम में किस तरह पैसों का बंदरबांट (How money is being misappropriated in the corporation) हुआ और कमीशनखोरी का कथित पहाड़ (The alleged mountain of commission-seeking) कैसे खड़ा किया गया।
यदि आरोपों में सच्चाई है, तो संबंधित अधिकारियों को जनता के सामने जवाब (Accountability of concerned officials to the public) देना होगा। आखिर जनता के टैक्स का पैसा (Public tax money) गया कहां और बदले में शहर को क्या मिला?







