Gold and Silver Price News: सोना-चांदी के दामों में लगातार चौथे दिन बड़ी गिरावट, खरीदारों और निवेशकों के लिए खुला सुनहरा मौका, बाजार में बढ़ी हलचल
Gold and Silver Price News: भारतीय कमोडिटी बाजारों (Indian commodity markets) में आज लगातार चौथे दिन सोने (Gold) और चांदी की कीमतों में गिरावट (Drop in silver prices) आई। कमजोर ग्लोबल संकेतों (Weak global cues) और स्थानीय स्तर पर मांग में कमी के कारण (Due to a decline in local demand) अगस्त डिलीवरी वाला सोना 0.30 प्रतिशत गिरकर 1,44,861 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस बीच, चांदी की कीमतें भी फिसलकर (Silver prices also slipped) 2,26,137 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई हैं। इस लगातार गिरावट के कारण, बाजार आम खरीदारों के लिए निवेश का एक अच्छा मौका (A good investment opportunity for buyers.) बनता दिख रहा है।
बाजारों पर अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव (Rising geopolitical tensions between the US and Iran) के कारण, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों पर भारी दबाव बना (Gold prices came under heavy pressure.) हुआ है। मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट (Ongoing crisis in the Middle East) और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावनाओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित (The possibilities influenced investor sentiment.) किया है। वैश्विक स्तर पर, इस हफ्ते हाजिर सोने की कीमतों (Spot gold prices) में 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डॉलर की मजबूती (Strengthening of the dollar) और महंगाई का डर इस समय सोने की तेजी (Fear of inflation driving the surge in gold prices right now.) के लिए एक बड़ी रुकावट बना हुआ है।
मार्केट की आगे की चाल और एक्सपर्ट की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सेंट्रल बैंकों की लगातार गोल्ड की खरीद इस मेटल (Central banks’ continued purchase of gold) के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो रही है। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना जैसे इंस्टीट्यूशन्स की एक्टिविटी ने मार्केट को सहारा (Activity from institutions like the People’s Bank of China supported the market.) दिया है। हालांकि, HSBC के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि 2026 में गोल्ड की एवरेज कीमत $4,560 प्रति औंस के आसपास रह सकती है। आने वाले समय में इकोनॉमिक फ्रंट पर बदलाव (Changes on the economic front over time) और ग्लोबल वोलैटिलिटी मार्केट (Global Volatility Market) की आगे की दिशा तय करेंगे।







