Breaking News: भारत का ‘लॉन्ग जंप किंग’ बना मुरली श्रीशंकर; लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ मेडल के साथ रचा ऐसा इतिहास, जिसे आज तक कोई भारतीय नहीं कर पाया

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Breaking News: भारत का ‘लॉन्ग जंप किंग’ बना मुरली श्रीशंकर; लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ मेडल के साथ रचा ऐसा इतिहास, जिसे आज तक कोई भारतीय नहीं कर पाया

Breaking News: भारतीय स्टार लॉन्ग जम्पर (Indian star long jumper) मुरली श्रीशंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच (Make history) दिया है और भारत को एक और सिल्वर मेडल (Silver medal) दिलाया है। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में दो मेडल जीतने वाले भारत के पहले लॉन्ग जम्पर (First Indian long jumper to win two medals at the Commonwealth Games) भी बन गए हैं। इससे पहले, मुरली श्रीशंकर ने बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीता था।

 

 

मुरली श्रीशंकर स्कॉटलैंड के ग्लासगो में पुरुषों के लॉन्ग जम्प फाइनल (Men’s long jump final in Glasgow) में 8.09 मीटर की बेस्ट जंप के साथ दूसरे स्थान पर रहे। जमैका के पूर्व वर्ल्ड चैंपियन ताजे गेल (Men’s long jump final in Glasgow)  ने 8.15m की छलांग के साथ गोल्ड जीता, जबकि होस्ट स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी (Host Scotland’s Stephen Mackenzie) ने 8.08m के साथ ब्रॉन्ज़ मेडल जीता।

 

 

श्रीशंकर की शानदार वापसी
सिल्वर मेडल (Silver medal) श्रीशंकर के लिए बेहद खास था, जिन्हें करीब एक साल पहले पटेला टेंडन में गंभीर चोट लगी (Severe injury to the tendon.) थी, जिससे उनके करियर पर सवाल उठ रहे (Questions are being raised about the career.) थे। अप्रैल 2024 में लगी इस चोट के कारण उन्हें सर्जरी करवानी पड़ी और वे पेरिस ओलंपिक 2024 में हिस्सा नहीं ले पाए। हालांकि, उन्होंने कड़ी मेहनत और शानदार वापसी के दम पर ग्लासगो में फिर से अपनी छाप (Striking comeback to make mark in Glasgowछोड़ी।

 

 

भारत ने जीते चार मेडल
मुरली श्रीशंकर की इस कामयाबी (This achievement of Murali Sreeshankar)  के साथ, कॉमनवेल्थ गेम्स के लॉन्ग जंप इतिहास में भारत (Commonwealth Games Long Jump History in India) के अब कुल चार मेडल हो गए हैं। इससे पहले सुरेश बाबू ने 1978 में कांस्य, अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2002 में कांस्य और एम. प्रजुषा ने 2010 में रजत पदक जीतकर भारत के लिए पदक जीते थे। अब श्रीशंकर ने अपने दूसरे राष्ट्रमंडल पदक के साथ भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक नया अध्याय (A new chapter in the history of Indian athletics.)  जोड़ा।

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