Singrauli News: सिंगरौली के तेलदह टोल प्लाजा में 10 साल से धर्मकांटा गायब, ओवरलोड वाहनों की जांच और सरकारी राजस्व पर उठे गंभीर सवाल?
नई ताकत न्यूज नेटवर्क | सिंगरौली
Singrauli News: सिंगरौली एमपीआरडीसी के द्वारा बैढ़न बरगवां मार्ग के तेलदह-गड़ेरिया में मालवाहको से टोल वसूलने के लिए टोल प्लाजा (Toll plaza for collecting toll from goods vehicles at Teldah-Gaderiya on Baidhan Bargawan road) लगाया गया है, किंतु इस टोल प्लाजा में एक दशक से स्टेटिक धर्मकांटा नही है।
दरअसल एमपीआरडीसी के द्वारा टोल प्लाजा पर धर्मकांटा यानी वेब्रिज स्थापित करने के स्पष्ट निर्देश (Clear instructions from MPRDC to install ‘Dharmakanta’ (weighbridges) at toll plazas.) है। यह केवल एक विकल्प नही, बल्कि टोल प्लाजा के आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा(Not merely an option, but a crucial component of the essential infrastructure of a toll plaza.) है, जिसमें व्यावसायिक वाहनों की जांच करने के लिए टोल प्लाजा के पास या उसके ठीक पहले वे इन मोशन या स्टेटिक धर्मकांटा लगाना अनिवार्य होता (Installing a weighbridge—whether dynamic (in-motion) or static—is mandatory.) है। सूत्र बताते हैं कि 2026 में भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के हालिया नियमो और राज्य सरकारों के कड़े निर्देश के अनुसार ओव्हर लोड वाहनों पर जुर्माना वसूलने (As per the recent rules of the Ministry of Road Transport and Highways, Government of India and strict instructions of the State Governments, penalty will be imposed on overloaded vehicles.) और उन्हें तब तक आगे न जाने देने का प्रावधान है, जब तक वे अतिरिक्त वजन को कम न करदे। इस नियम को क्रियान्वयन के लिए हर प्रमुख व्यावसायिक टोल प्लाजा में वजन मशीन होना जरूरी (Weighing machines are mandatory at major commercial toll plazas.) है, लेकिन बैढ़न-बरगवां मार्ग के तेलदह-गड़ेरिया में स्थापित एमपीआरडीसी के टोल प्लाजा में धर्मकांटा (Weighbridge at the MPRDC toll plaza located at Teldah-Gaderiya on the Baidhan-Bargawan road.) आज तक नही लगा है और न ही उसके आसपास वजन मशीन है। यहां जबकि रोजाना सैकड़ों की संख्या में कोल वाहन के अलावा एश डाइक वाहन, गिट्टी व रेता का परिवहन करते हैं। टोल प्लाजा पर वजन नापने का कार्य कहां से होता होगा, इसका जवाब एमपीआरडीसी के अधिकारी के पास भी नही है। गोलमाल जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। फिलहाल टोल प्लाजा पर अब तक एक दशक से धर्मकांटा स्थापित न होने पर तरह-तरह के सवाल खड़े किये जा रहे हैं।
सरकार को लम्बी चपत, करोड़ों का खेला
दरअसल यही कहा जा रहा है कि यदि तेलदह टोल प्लाजा पर धर्मकांटा यानी वजन मापने की मशीन लगी (A weighbridge—a machine for measuring weight—has been installed at the Teldah toll plaza.) होती तो, निश्चित ही प्रदेश सरकार को राजस्व लाभ मिलता(The state government would certainly have gained revenue benefits.) । परंतु एक दशक से टोल प्लाजा पर वजन मशीन स्थापित न होने से ओव्हर लोड व्यावसायिक वाहनों से वसूली न होने पर प्रदेश सरकार को राजस्व के रूप में चपत लगी है और यह चपत एमपीआरडीसी के लापरवाही से या सांठगांठ (This loss is due to negligence or collusion of MPRDC.) से लगी है। यहां बताते चले कि इस मार्ग से एनसीएल, एनटीपीसी, शक्तिनगर, रिहंद, विंध्यनगर समेत एनर्जेन पावर बंधौरा, हिंडाल्को, सासन पावर रिलायंस के हैवी मशीनरियों का आना-जाना लगा रहता है और इसी मार्ग से कोयला, राखड़, गिट्टी व रेता के साथ-साथ अन्य सामग्रियों को लेकर मालवाहक का अप-डाउन होता (The cargo carrier makes round trips transporting other materials.) रहता है। फिर क्या कोई भी वाहन ओव्हर लोड में नही रहते हैं? यह अपने आप में ही एक बड़ा सवाल है।
सवालों के घेरे में एमपीआरडीसी का अमला
दरअसल प्रत्येक व्यवसायिक टोल प्लाजा पर वजन मशीन का स्थापित करना अनिवार्य (Installation of a weighing machine at every commercial toll plaza is mandatory.) है और वजन मशीन कानूनी तौर पर अधिकृत रूप से धर्मकांटा उपलब्ध होना चाहिए और धर्मकांटा चालू होना (A legally authorized public weighbridge must be available and operational.) चाहिए, परंतु तेलदह-गड़ेरिया टोल प्लाजा पर एक दशक से धर्मकांटा नही है। आरोप लगाया जा रहा है कि एमपीआरडीसी के अधिकारियों के सांठगांठ के चलते तेलदह के टोल प्लाजा पर धर्मकांटा स्थापित नही किया (Due to collusion among officials, a weighbridge was not installed at the Teldah toll plaza.) जा सका है, जबकि भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का कड़ा निर्देश है। टोल प्लाजा पर अब तक धर्मकांटा न होने से यही आरोप लगाया जा रहा है कि टोल प्लाजा संविदाकार और एमपीआरडीसी के बीच बेहतर तालमेल है। शायद इसी के चलते अब तक वजन मशीन स्थापित नही की गई है। ताकि सरकार को आर्थिक चूना लगाया जा सके।
इनका कहना:-
तेलदह में 2016 में टोल प्लाजा स्थापित किया गया था, उस समय ऐसा कोई प्रावधान नही था। करीब 90 प्रतिशत से अधिक वाहनों में फास्ट ट्रेक है। नाजायज वसूली का कोई प्रश्न ही नही उठता है। यदि शिकायत है तो जांच कराई जाएगी।
समीर गौहर
सहायक प्रबंधक
एमपीआरडीसी,सिंगरौली







