Singrauli News: सिंगरौली में DMF खरीदी पर बड़ा बवाल, रोटी मेकर मशीनों से लेकर कूलर-जिम सामग्री तक उठे सवाल; जांच की मांग तेज़?

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Singrauli News: सिंगरौली में DMF खरीदी पर बड़ा बवाल, रोटी मेकर मशीनों से लेकर कूलर-जिम सामग्री तक उठे सवाल; जांच की मांग तेज़?

नई ताकत न्यूज नेटवर्क | सिंगरौली

Singrauli News:  सिंगरौली में आदिवासी विकास विभाग के छात्रावासों में डीएमएफ की राशि से रोटी मेकर मशीनों की खरीदी (Purchase of roti-making machines for Tribal Development Department hostels using DMF funds.) का मामला नई ताकत न्यूज नेटवर्क में खबर प्रकाशित होने के तीन दिन बाद भी चर्चाओं में है। अब सवाल केवल मशीनों की कीमत और गुणवत्ता तक सीमित नहीं रह (The question is not limited only to the price and quality of the machines.)  गया है, बल्कि खरीदी से जुड़े सप्लायर, कथित दलालों और उनके संपर्कों की पहचान कराने की मांग भी उठने लगी है।

 

 

 

चर्चाओं में सिंगरौली से लेकर भोपाल, इंदौर और उज्जैन तक संभावित संपर्कों की बात कही जा रही है। हालांकि इन संपर्कों और किसी कथित नेटवर्क की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई (However, there has been no independent confirmation of these contacts or the role of any alleged network.) है। ऐसे में पूरे मामले की विधिवत जांच कर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सप्लायर कौन हैं, खरीदी की प्रक्रिया में किन लोगों ने भूमिका निभाई और भुगतान से किसे लाभ मिला (Who played a role in the procurement process, and who benefited from the payment?) । जिले के 80 से अधिक छात्रावासों में रोटी मेकर मशीनों की खरीदी को लेकर पहले ही सवाल उठ चुके हैं। बताया जा रहा है कि छात्रावासों को महीने में अधिकतम पांच से छ: घरेलू गैस सिलेंडरों की खरीदी के लिए बजट मिल पाता है, जबकि मशीनों के नियमित संचालन के लिए करीब 15 सिलेंडरों की जरूरत पड़ने का दावा किया जा रहा (It is being claimed that approximately 15 cylinders are required for the regular operation of the machines.) है। ऐसे में अतिरिक्त सिलेंडरों का खर्च कहां से आएगा और पर्याप्त संचालन बजट के बिना मशीनें खरीदने का निर्णय किस आधार पर लिया (Where will the funds for additional cylinders come from, and on what basis was the decision made to purchase the machines without an adequate operating budget?) गया, यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है। इधर मामले में अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि केवल विभागीय स्तर पर औपचारिक जांच करने के बजाय खरीदी से जुड़े सभी पक्षों की भूमिका का परीक्षण किया जाए। सिंगरौली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन तक संपर्कों की जो चर्चाएं हैं, उनकी भी दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच होनी चाहिए। सप्लायरों का चयन कैसे हुआ, किन दरों पर मशीनें खरीदी गईं, भुगतान किन फर्मों को किया गया और किसी बिचौलिए ने भूमिका निभाई या नहीं, इन सवालों का जवाब सामने आना चाहिए।

 

 

 

 

डीएमएफ की खरीदी पर प्रशासन की जवाबदेही

आप प्रदेश सचिव राजेश सोनी का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों में डीएमएफ की राशि से शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, कृषि बीज और उद्यानिकी सहित अन्य विभागों में हुई खरीदी की भी समीक्षा कराने की मांग उठ रही है। अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह आरोपों और चर्चाओं के बीच तथ्यों को सार्वजनिक (The challenge before the administration now is to make the facts public amidst allegations and discussions.) करे। खरीदी आदेश, निविदा प्रक्रिया, आपूर्ति अभिलेख, भुगतान विवरण और सामग्री का भौतिक सत्यापन कराकर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सप्लायर कौन हैं, कथित दलाल कौन हैं और खरीदी की पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका रही। निष्पक्ष जांच से ही इन सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।

 

 

 

कूलर और जिम सामग्री की खरीदी भी जांच के दायरे में

आदिवासी विकास विभाग में करीब सैकड़ों कूलरों की खरीदी और छात्रावासों के लिए जिम सामग्री उपलब्ध कराने के मामले में भी लागत (The cost also includes the purchase of hundreds of coolers and providing gym equipment for hostels.) , गुणवत्ता तथा वास्तविक उपयोगिता का सत्यापन कराने की मांग उठ रही है। खरीदी गई सामग्री की संख्या, स्वीकृत दरों, बिलों और मौके पर उपलब्ध सामान का मिलान कराया जाना चाहिए। आम आदमी पार्टी के प्रदेश सचिव राजेश सोनी ने रोटी मेकर मशीनों की खरीदी में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग (Demand for a high-level inquiry, alleging irregularities in procurement.) की थी।

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