Gold and Silver Prices News: गोल्ड मार्केट को बड़ा झटका, कीमतों में उछाल, बढ़े टैक्स और महंगाई के दबाव ने ग्राहकों को किया दूर, कारोबारियों की बिक्री में भी भारी गिरावट दर्ज
Gold and Silver Prices News: सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी (Heavy hike in import duty on gold) के बाद देश में पीली धातु की डिमांड में भारी गिरावट (There has been a sharp decline in the demand for the yellow metal in the country.) आई है। मार्केट के ताजा आकलन के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में सोने की डिमांड घटकर (Decreased demand for gold) सिर्फ 7.5 टन रह गई, जो पिछले साल इसी समय में करीब 25 टन थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ती लागत, महंगाई का दबाव (inflation pressure) और कंज्यूमर की बदलती प्राथमिकताओं ने गोल्ड मार्केट की रफ्तार धीमी (Changing consumer preferences slowed the gold market.) कर दी है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे बुरा असर छोटे और अनऑर्गनाइज्ड ट्रेडर्स पर पड़ा (Unorganized traders suffer) है, जिनकी हिस्सेदारी देश के कुल गोल्ड ट्रेड में करीब 65 परसेंट मानी जाती है। बढ़ी कीमतों के कारण कस्टमर्स ने खरीदारी टालनी शुरू (Due to the increased prices, customers started postponing their purchases.) कर दी है। मुंबई के स्पॉट मार्केट में 999 प्योरिटी वाला सोना करीब 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है, जिससे आम कंज्यूमर के लिए सोना पहले से ज्यादा महंगा (Gold is more expensive than before for the common consumer) हो गया है।
ज्वेलरी ट्रेडर्स का कहना है कि सिर्फ इंपोर्ट ड्यूटी ही नहीं, बल्कि पेट्रोल-डीजल (petrol-diesel) , खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों ने भी लोगों की खरीदने की ताकत (The rising prices of everyday necessities have also reduced the purchasing power of the people.) पर असर डाला है। ऐसे में, कंज्यूमर अभी इन्वेस्टमेंट (Consumers are investing now) और ज्वेलरी खरीदने के बजाय ज़रूरी खर्चों को प्राथमिकता (Prioritize essential expenses over buying jewelry) दे रहे हैं।
मार्केट एनालिस्ट (market analyst) के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना न खरीदने की अपील (Appeal not to buy gold for one year) का भी कुछ असर हुआ है। बड़े ज्वेलरी रिटेल चेन ऑपरेटर्स (Large jewelry retail chain operators) का कहना है कि उनकी बिक्री में 35 परसेंट से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, आने वाले महीनों में डिमांड किस दिशा में जाएगी, इस बारे में अभी कोई साफ तस्वीर नहीं है।
इंडस्ट्री का अनुमान है कि साल की पहली तिमाही में मजबूत रही सोने की डिमांड दूसरी तिमाही में कमजोर पड़ (Gold demand weakened in the second quarter) सकती है। अगर कीमतों और टैक्स पर दबाव जारी रहा तो आने वाले समय में सोने के बिजनेस (Gold Business in Time) को और चुनौतियों का सामना करना (facing challenges) पड़ सकता है।







