Singrauli Breaking News: नगर निगम सिंगरौली में ऑडिटर की मनमानी? कमीशन और चेहरे देखकर लगती हैं फाइलें

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Thursday, May 28, 2026 9:33 AM

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Singrauli Breaking News: नगर निगम सिंगरौली में ऑडिटर की मनमानी? कमीशन और चेहरे देखकर लगती हैं फाइलें

नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क सिंगरौली
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Singrauli Breaking News:  नगर निगम सिंगरौली में भ्रष्टाचार (Corruption in Singrauli Municipal Corporation)  और कमीशनखोरी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े (Questions raised once again regarding the practice of taking commissions.) होने लगे हैं। आरोप है कि नगर निगम में विकास कार्यों से लेकर भुगतान प्रक्रिया तक (It is alleged that from development works to payment process in the Municipal Corporation) में “कमीशन संस्कृति” हावी हो चुकी है। ठेकेदारों और कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि बिना “सेटिंग” के फाइल आगे बढ़ना मुश्किल हो गया है।

 

 

बताया जा रहा है कि नगर निगम क्षेत्र में कोई भी काम हो (Any work in the municipal area) , संबंधित अधिकारियों (Concerned Officials) को अपनी “मनमानी रकम” चाहिए। आरोप यह भी है कि काम पूरा होने के बाद भी भुगतान (It is also alleged that payment was not made even after the work was completed.) के समय कमीशन को लेकर दबाव (Pressure regarding the commission) बनाया जाता है। यदि कोई ठेकेदार या कर्मचारी कथित तौर पर मनमाफिक रकम (A contractor or employee allegedly extorted money) नहीं देता, तो उसकी फाइल में आपत्ति लगाकर महीनों तक घुमाया जाता (Objections were raised against his file, and he was made to run around for months.) है।

 

 

 

अब नगर निगम के ऑडिटर भी सवालों (Municipal Corporation auditors also questioned) के घेरे में हैं। चर्चा है कि ऑडिटर साहब “आदमी, चेहरा और कमीशन” देखकर ही फाइलों को आगे बढ़ाते हैं। यदि किसी ने कथित तौर पर कमीशन नहीं दिया, तो उसकी फाइल में तकनीकी आपत्तियां लगाकर भुगतान रोक (Payment withheld by raising technical objections in the file.)  दिया जाता है। इससे न केवल ठेकेदार परेशान हैं, बल्कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान तक प्रभावित (Even employees’ salary payments have been affected.)  हो रहे हैं।

 

सूत्रों के मुताबिक, नगर निगम के कई ठेकेदारों का कहना है कि ऑडिटर  (Many municipal contractors say that the auditor) द्वारा लगाए गए आपत्तियों के कारण उनके लाखों रुपये अटक जाते हैं। वहीं कर्मचारियों के भुगतान में भी देरी (Delay in Employee Payments as Well) होने से नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

 

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नगर निगम प्रशासन (Municipal Corporation Administration) अपने हिसाब से विकास कार्य कराना चाहता है, तो फिर भुगतान प्रक्रिया में बार-बार अड़चन क्यों डाली जा रही है? आखिर ऑडिटर (After all, the auditor…) द्वारा लगाए जा रहे आपत्तियों का आधार क्या है और कथित कमीशनखोरी (Alleged Commission-taking) पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

 

 

नगर निगम के गलियारों से लेकर आम जनता के बीच अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि आखिर ऑडिटर साहब कितने प्रतिशत कमीशन लेते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह जरूर खड़े कर रहे हैं।

 

 

अब देखना होगा कि नगर निगम कमिश्नर (Municipal Commissioner)  इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती हैं। क्या ऑडिटर की कार्यप्रणाली की जांच होगी? क्या ठेकेदारों और कर्मचारियों की शिकायतों पर कोई कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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