“सहकार ग्लोबल कर्मचारी से मारपीट के बाद खुली प्रशासन की नींद? जियावन-देवसर में अवैध रेत कारोबार पर कार्रवाई शुरू”
अवैध रेत कारोबार पर अब जागी पुलिस और माइनिंग टीम, सवालों के घेरे में पुरानी कार्यप्रणाली
Devsar/Jiawan breaking news: जियावन थाना क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध रेत कारोबार पर आखिरकार पुलिस (Police finally crack down on illegal sand trade) और माइनिंग विभाग की संयुक्त कार्रवाई शुरू (Mining department begins joint action) हो गई है। क्षेत्र में अवैध रेत भंडारण जब्ती (Illegal sand storage seized in the area) की जा रही है, लेकिन इस कार्रवाई ने कई पुराने सवाल भी खड़े (Many old questions remain.) कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों (local people) का कहना है कि जियावन और देवसर क्षेत्र में अवैध रेत का कारोबार कोई नई बात (Illegal sand trade is nothing new in the Devsar area.) नहीं है। लंबे समय से खुलेआम रेत का उत्खनन (open sand mining) और परिवहन होता रहा है। कई बार स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों (public representatives) और पत्रकारों द्वारा इसकी शिकायतें की गईं। नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क ने भी समय-समय पर फोटो, वीडियो और समाचार प्रकाशित कर प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित (Attracting the attention of the administration by publishing news) किया, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई देखने (To see effective action by the responsible departments) को नहीं मिली।
चर्चा का विषय यह है कि जब क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन की खबरें लगातार (When there are continuous reports of illegal sand transportation in the area) सामने आ रही थीं, तब पुलिस और माइनिंग विभाग सक्रिय (Mining department active) क्यों नहीं हुए? आखिर ऐसा क्या हुआ कि अचानक बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू (Suddenly, a massive crackdown began) कर दी गई?
क्षेत्र में चर्चा है कि सहकार ग्लोबल कंपनी के कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट (Alleged assault on employees of Sahakar Global company) और एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद पुलिस और माइनिंग विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर अवैध रेत से जुड़े वाहनों की धरपकड़ शुरू (The Mining Department launched a joint operation to seize vehicles carrying illegal sand.) की। लोगों का कहना है कि यदि यही सक्रियता पहले दिखाई जाती, तो शायद अवैध कारोबार इतना व्यापक नहीं हो पाता।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अवैध रेत कारोबार बिना संरक्षण (Social activists allege that illegal sand mining is going on without protection.) के संभव नहीं है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर इतने लंबे समय तक यह कारोबार किन परिस्थितियों में फलता-फूलता (thrive under the circumstances) रहा।
अब जबकि कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लोगों की नजर इस बात पर है कि यह अभियान केवल कुछ दिनों तक सीमित (This campaign is limited to a few days only.) रहता है या फिर अवैध रेत कारोबार के खिलाफ स्थायी (Permanent action against illegal sand mining) और निष्पक्ष कार्रवाई की जाती है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि केवल भंडारण की जब्ती से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई आवश्यक (Action is necessary against those responsible) है।







