सिंगरौली में अवैध रेत कारोबार पर बड़े सवाल: नेताओं, पुलिस और कारोबारियों की कथित मिलीभगत से सरकार को करोड़ों का नुकसान?
नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क सिंगरौली
___________________________
Awanish tiwari
Singrauli Breaking News: सिंगरौली जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन (transportation) को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल (serious question) खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस कारोबार में राजनीतिक संरक्षण, प्रभावशाली लोगों की भागीदारी (Involvement of influential people) और पुलिस की कथित मिलीभगत के कारण अवैध गतिविधियां लगातार फल-फूल रही हैं।
सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, अवैध रेत कारोबार में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों (People associated with various political parties involved in illegal sand business) , जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों और स्थानीय नेटवर्क के शामिल होने के आरोप लगाए (Allegations of local network involvement) जाते रहे हैं। आरोप यह भी हैं कि अवैध कारोबार संचालित (operate illegal business) करने वाले कुछ समूह कथित रूप से पुलिस को नियमित आर्थिक लाभ पहुंचाकर संरक्षण प्राप्त (Protection by providing regular financial benefits) करते हैं।
दूसरी ओर, करोड़ों रुपये का टेंडर लेकर कार्य कर रही अधिकृत कंपनी अपने निर्धारित नियमों (prescribed rules) और सरकारी मानकों के अनुसार रेत उत्खनन एवं बिक्री कर रही है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर होने वाले कथित अवैध उत्खनन से न केवल कंपनी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार के राजस्व को भी भारी क्षति (There was also a huge loss to the revenue of the Madhya Pradesh government) .होने की बात सामने आ रही है।
जानकारों का कहना है कि अवैध रेत कारोबार केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे नदी-नालों का प्राकृतिक स्वरूप भी प्रभावित हो रहा है। अनियंत्रित उत्खनन पर्यावरणीय असंतुलन पैदा कर सकता है और भविष्य में जल संकट जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है।
आरोप यह भी लगाए जाते रहे हैं कि लंबे समय से एक ही क्षेत्र में पदस्थ कुछ पुलिसकर्मियों (Some policemen posted in the same area) और थाना प्रभारियों के कारण कथित नेटवर्क इतना मजबूत हो जाता है कि अवैध कारोबारियों तक पहुंचना (Reaching out to traffickers) और उन पर प्रभावी कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अवैध कारोबार से जुड़े समूह कथित तौर पर उत्खनन स्थलों (Illegal groups are reportedly targeting excavation sites.) से लेकर परिवहन मार्गों तक अपने लोगों को सक्रिय रखते हैं।
हालांकि, कई मौकों पर अधिकृत कंपनी के कर्मचारियों द्वारा अवैध परिवहन में संलिप्त (Illegal transportation by employees of authorized company) बताई गई गाड़ियों को पकड़कर पुलिस के हवाले किए जाने और कार्रवाई होने की जानकारी भी सामने आई है। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठते रहे हैं कि क्या कार्रवाई इतनी प्रभावी होती है कि दोबारा ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके?
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब सरकार अवैध कारोबार पर रोक लगाने की बात करती (When the government talks about stopping illegal trade) है, तब जमीनी स्तर पर यह गतिविधियां आखिर कैसे जारी रहती हैं? यदि आरोपों में सच्चाई है तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि अवैध उत्खनन, राजस्व नुकसान, पर्यावरणीय क्षति और कथित संरक्षण तंत्र की वास्तविक तस्वीर (The real picture of the alleged protection mechanism) सामने आ सके।







