Singrauli Breaking News: इंक्रीमेंट-वेतन वृद्धि के नाम पर रिश्वत! बैढ़न कार्यालय में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Friday, May 29, 2026 11:47 AM

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Singrauli Breaking News: इंक्रीमेंट-वेतन वृद्धि के नाम पर रिश्वत! बैढ़न कार्यालय में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

आदिवासी विकास विभाग बैढ़न में लोकायुक्त की कार्रवाई : 5 हजार रुपये लेते वर्ग-2 अधिकारी मुन्नालाल वर्मा गिरफ्तार, संजय पांडेय पर भी आरोप

नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क सिंगरौली
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Singrauli Breaking News: बैढ़न सिंगरौली जिले के आदिवासी विकास विभाग बैढ़न कार्यालय (Tribal Development Department, Baidhan Office) में गुरुवार को लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई (Lokayukta Takes Major Action)  करते हुए एक अधिकारी को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार (Official Arrested for Allegedly Accepting a Bribe) किया। कार्रवाई में वर्ग-2 अधिकारी मुन्नालाल वर्मा को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। मामला देवसर परियोजना में पदस्थ कर्मचारी श्रवण तिवारी से इंक्रीमेंट और वेतन वृद्धि से जुड़े कार्य के एवज में पैसे मांगने का बताया  (He alleged that money was demanded in exchange for work related to a salary increment.) जा रहा है। वहीं इस पूरे प्रकरण में संजय पांडेय पर भी पैसे मांगने के आरोप लगे हैं, लेकिन कार्रवाई के दौरान उनके भोपाल में होने की जानकारी सामने आई (Information has surfaced indicating a presence in Bhopal.)  है, जिसके कारण उनकी गिरफ्तारी नहीं हो (No arrest should be made.) सकी।
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता श्रवण तिवारी, जो देवसर परियोजना में पदस्थ (Posted in Devsar Project) बताए जा रहे हैं, को अपने इंक्रीमेंट और वेतन वृद्धि संबंधी कार्य कराने के लिए विभागीय प्रक्रिया से गुजरना (Undergoing departmental procedures to process salary increments.) था। आरोप है कि इस कार्य को आगे (It is alleged that this work was further) बढ़ाने के नाम पर उनसे 7 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई थी।
बताया जा रहा है कि विभागीय कार्य के बदले पैसे मांगे जाने से परेशान (Distressed by demands for money in exchange for official work.) होकर श्रवण तिवारी ने मामले की शिकायत लोकायुक्त (Complaint regarding the matter to the Lokayukta) से करने का फैसला लिया। शिकायतकर्ता ने 25 मई को लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी और कार्रवाई की मांग की।

 

 

 

शिकायत प्राप्त होने के बाद लोकायुक्त टीम (Lokayukta team after receiving the complaint)  ने मामले का प्रारंभिक सत्यापन शुरू किया। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि (Verification of the allegations made in the complaint) के बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की तैयारी की। शिकायतकर्ता को प्रक्रिया समझाई (The procedure was explained to the complainant.) गई और पूरी रणनीति के तहत कार्रवाई का समय तय किया गया।
इसके बाद 29 मई को करीब दोपहर 2 बजे लोकायुक्त की टीम सक्रिय हुई। कार्रवाई के दौरान आदिवासी विकास विभाग बैढ़न कार्यालय (Tribal Development Department, Baidhan Office) में कथित रूप से रिश्वत का लेन-देन होते ही टीम ने दबिश दी और मुन्नालाल वर्मा को 5 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।
लोकायुक्त की कार्रवाई होते ही विभागीय कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। टीम ने मौके पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेजी कार्रवाई और साक्ष्य संकलन की कार्रवाई की। घटना की खबर फैलते ही विभागीय और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।
इस मामले में एक और नाम संजय पांडेय का भी सामने आया है। सूत्रों और शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार (According to the complainant party,)  संजय पांडेय पर भी पैसे मांगने के आरोप (Allegations of demanding money) लगाए गए हैं। हालांकि कार्रवाई के दौरान उनके भोपाल में होने की जानकारी सामने आई, जिसके कारण उन्हें मौके पर गिरफ्तार नहीं किया जा सका। अब जांच एजेंसी द्वारा उनकी भूमिका को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर नजर बनी हुई है।

 

 

 

मामले ने सरकारी विभागों में कामकाज की पारदर्शिता (The case has brought the transparency of operations in government departments into focus.) और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर इंक्रीमेंट और वेतन वृद्धि जैसे कार्य विभागीय नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत (under due process)  किए जाते हैं, ऐसे में यदि किसी कर्मचारी से इसके बदले पैसे मांगे जाने के आरोप सही (Allegations of demanding money in exchange are true.) पाए जाते हैं तो यह गंभीर मामला माना जाएगा।
हालांकि कानूनी प्रक्रिया के तहत किसी भी आरोपी के खिलाफ (However, under the legal process, no action can be taken against any accused.) अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आता है। फिलहाल लोकायुक्त (Currently, the Lokayukta)  द्वारा की गई कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्यवाही (Legal Proceedings) जारी है।
सूत्रों के मुताबिक, रिश्वत मांगने और लेने से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज (Cases Registered under the Prevention of Corruption Act) किए जा सकते हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में और क्या तथ्य सामने आते हैं तथा संजय पांडेय की भूमिका को लेकर क्या स्थिति स्पष्ट (Is the situation regarding the role clear?) होती है।

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