Singrauli Breaking News: सिंगरौली नगर निगम में स्मार्ट स्ट्रीट लाइट टेंडर पर बड़ा बवाल; ₹55 लाख के भुगतान के बाद उठे सवालों से मचा हड़कंप, अब हर नजर निष्पक्ष जांच पर?
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Singrauli Breaking News: नगर पालिक निगम सिंगरौली की विद्युत शाखा (Electrical Department, Singrauli Municipal Corporation) एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र (once again the center of discussions) में है। माजन मोड़ से इंदिरा चौक तक स्मार्ट डिमेबल स्ट्रीट लाइट की आपूर्ति एवं स्थापना के कार्य (Supply and installation of smart dimmable street lights from Majan Mod to Indira Chowk.) को लेकर टेंडर प्रक्रिया, सामग्री क्रय, भुगतान और कार्य निष्पादन पर कई तरह के सवाल उठ (Many questions have been raised about the performance of the work.) रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस कार्य पर अब तक करीब 55 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर लगातार चर्चाएं (Ongoing discussions regarding transparency in the entire matter.) बनी हुई हैं।
नगर निगम के जारी कार्यादेश (Work orders issued by the Municipal Corporation) के अनुसार 13 फरवरी को भोपाल स्थित एम/एस एमआर इलेक्ट्रिकल्स को यह कार्य सौंपा (This work was entrusted to M/s MR Electricals.) गया। दस्तावेज के मुताबिक कार्य का अनुमानित मूल्य 78 लाख 40 हजार रुपये तथा स्वीकृत कुल लागत 92 लाख 4 हजार 944 रुपये दर्ज है। ठेका एसओआर से 0.50 प्रतिशत कम दर पर स्वीकृत किया गया तथा कार्य पूर्ण करने की अवधि दो माह निर्धारित (Approved, and the timeframe for completing the work was set at two months.) की गई थी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस टेंडर में कुल कितने निविदाकारों ने आवेदन (How many bidders in total applied for the tender?) किया था। यदि किसी ठेकेदार ने अपनी निविदा वापस ली या टेंडर प्रक्रिया से स्वयं (The contractor withdrew his tender or withdrew himself from the tender process.) को अलग किया, तो क्या इसके लिए निर्धारित नियमों और प्रावधानों का पालन (Compliance with provisions) किया गया, इस पूरे मामले में नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। चर्चाओं का विषय केवल टेंडर तक सीमित (Discussions limited only to the tender.) नहीं है।
सामग्री की खरीद, गुणवत्ता, माप पुस्तिका, भुगतान की प्रक्रिया (Material procurement, quality, measurement book, payment process) और कार्य की वास्तविक प्रगति को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं (There is also all sorts of speculation regarding the actual progress of the work.) हैं। नगर निगम की विद्युत शाखा की कार्यप्रणाली पहले भी सवालों के घेरे (The functioning of the Municipal Corporation’s electricity department has come under scrutiny in the past as well.)में रही है और इस बार भी अधिकारी निशाने पर हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई (The allegations have not been officially confirmed.) है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई या नहीं। फिलहाल नगर निगम की विद्युत शाखा में कथित अफसरशाही (At present, there is alleged bureaucracy in the electricity department of the Municipal Corporation.) और कार्यप्रणाली को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर तेज है।







