Singrauli News: सिंगरौली में काचन नदी पर प्रदूषण का खतरा; THDC कोल माइंस पर कोयलायुक्त पानी छोड़ने का आरोप, ग्रामीणों और मवेशियों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल?
नई ताकत न्यूज नेटवर्क | सिंगरौली
Singrauli News: सिंगरौली ऊर्जाधानी में कोयला उत्पादन की कीमत कहीं ग्रामीणों को अपनी जीवनदायिनी नदी की कीमत चुकाकर तो नहीं देनी पड़ रही, काचन नदी में टीएचडीसी कोल कंपनी की खदान का कोयलायुक्त पानी छोड़े (Villagers should not have to pay a heavy price for their life-sustaining river; coal-laden water from the THDC Coal Company’s mine is being discharged into the Kachan River.) जाने के आरोप ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत पिड़रवाह के सरपंच ने कंपनी पर नदी को प्रदूषित करने का आरोप लगाते हुए प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए (Alleging pollution of the river, questions were raised regarding the functioning of the administration and the Pollution Control Department.) हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस नदी का पानी आसपास के गांवों के लोगों और मवेशियों के लिए महत्वपूर्ण है, उसी में कोयले का पानी मिलने से खतरा बढ़ (Villagers say that the mixing of coal water in the river, which is vital for the people and cattle of the surrounding villages, poses a threat.) रहा है। यदि आरोप सही हैं, तो यह महज पर्यावरण का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीणों के जीवन और आजीविका से जुड़ा गंभीर विषय (A serious issue concerning the lives and livelihoods of villagers.) है।
जानकारी के मुताबिक, टीएचडीसी कोल कंपनी के कन्वेयर बेल्ट के प्रारंभिक हिस्से से लगभग 500 मीटर दूर पश्चिम दिशा में संचालित खदान से निकलने वाला पानी काचन नदी में छोड़े जाने का आरोप है। नदी पर कंपनी ने खदान तक आवागमन के लिए अस्थायी पुल बनाया (The company constructed a temporary bridge over the river to provide access to the mine.) है। इस पुल से रोजाना करीब एक हजार कोयला वाहनों की आवाजाही होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि परिवहन के दौरान वाहनों से कोयला नदी में भी गिरता (It is alleged that coal also falls into the river from the vehicles during transportation.) है। वहीं स्थानीय स्तर पर सामने आए विवरण के अनुसार, अस्थायी पुल के नीचे पानी के किनारे कोयले की परतें दिखाई देती हैं। नदी के किनारे जमा रेत पर भी जगह-जगह कोयला बिखरा होने की बात कही (It was also mentioned that coal was scattered here and there on the sand accumulated along the riverbank.) गई है। ऐसे में खदान के पानी और कोयले के नदी तक पहुंचने की वास्तविक स्थिति की जांच आवश्यक है।
प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से सवाल
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि काचन नदी में कथित रूप से कोयलायुक्त पानी छोड़े जाने पर जिला प्रशासन और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अमला गंभीरता क्यों नहीं दिखा रहा। मांग है कि मौके का निरीक्षण कर पानी (Why is the district administration and regional pollution control staff not taking the issue of coal-containing water seriously? It is demanded that the site be inspected and the water) के नमूने जांच के लिए भेजे जाएं, खदान से निकलने वाले पानी की निकासी व्यवस्था की जांच हो और दोष सामने आने पर कंपनी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। नदी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए निष्पक्ष जांच अब जरूरी हो गई
दूषित पानी पीने से मवेशियों की मौत का दावा
पिड़रवाह के सरपंच का आरोप है कि आसपास के दो-तीन गांवों के लोग काचन नदी के पानी का उपयोग (It is alleged that people of two-three nearby villages are using the water of Kachan river.) करते हैं और मवेशियों के लिए भी यही प्रमुख सहारा है। उनके मुताबिक, पिछले वर्ष दूषित पानी पीने से करीब आधा सैकड़ा मवेशियों की मौत हुई (Last year, around fifty cattle died after drinking contaminated water.) थी। ग्रामीणों के बीमार होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। हालांकि मौतों और बीमारियों के कारणों की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि आवश्यक (Independent medical confirmation of the causes of deaths and illnesses is essential.) है। वहीं सरपंच के अनुसार टीएचडीसी की खदान करीब पांच वर्षों से संचालित है और तभी से नदी में पानी छोड़े जाने की बात कही जा (According to the Sarpanch, the THDC mine has been operational for about five years and since then, there has been talk of releasing water into the river.) रही है। यदि ऐसा है, तो अब तक संबंधित विभागों ने पानी की गुणवत्ता, निकासी व्यवस्था और पर्यावरणीय प्रभावों की जांच किस स्तर पर की है?
इनका कहना:-
अभी मामला संज्ञान में नही आया था, टीएचडीसी कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।
रतिपाल ठाकुर
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी,सिंगरौली







