कौड़ियों में बिकी निगम की जमीन! कमिश्नर सविता प्रधान के कार्यकाल में “VIP प्लॉट गेम” का बड़ा खुलासा, न विज्ञापन, न MIC मंजूरी… फिर भी विधायक को आवंटन? सिंगरौली में सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
नई ताकत ब्यूरो सिंगरौली
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SINGRAULI NEWS: नगर निगम की जमीन अब “जनता की संपत्ति” कम और “पावरफुल लोगों की सुविधा” ज्यादा नजर आ रही है। आरोप है कि कमिश्नर सविता प्रधान के कार्यकाल में एक प्रभावशाली विधायक को बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के कौड़ियों के दाम पर प्लॉट आवंटित कर दिया गया—और पूरा सिस्टम मूकदर्शक बना रहा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस नगर निगम के अधिकारी अब तक आम लोगों को यह कहकर टालते रहे कि “कोई प्लॉट उपलब्ध नहीं है”, उसी निगम से अचानक पावर फुल लोगो को जमीन मिल जाना बड़े खेल की ओर इशारा करता है। राजस्व अधिकारी आरपी वैश्य के दावे भी अब सवालों के घेरे में हैं।
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे आवंटन में न तो कोई सार्वजनिक विज्ञापन निकाला गया, न ही आम जनता को आवेदन का मौका दिया गया। यानी पूरी प्रक्रिया को “चुपचाप फाइलों में सेट” कर दिया गया। इतना ही नहीं, यह मामला MIC (मेयर इन काउंसिल) में भी पास नहीं हुआ—फिर भी जमीन का आवंटन कर दिया गया।
चर्चा यह भी है कि इसी जमीन को पहले हासिल करने की कोशिश की गई थी, लेकिन तत्कालीन कमिश्नर दया किशन शर्मा के समय में अनुमति नहीं मिली। जैसे ही सविता प्रधान ने पद संभाला, फाइलों ने रफ्तार पकड़ ली और “ना” अचानक “हां” में बदल गई।
नगर निगम के अतिक्रमण अधिकारी और राजस्व अमले की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में है। आरोप साफ है—नियमों को ताक पर रखकर प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जबकि आम जनता को जानकारी तक नहीं दी जाती।
शहर में यह चर्चा आम हो चुकी है कि निगम की जमीनों पर “VIP कब्जा” तेजी से बढ़ रहा है और जिम्मेदार अधिकारी या तो खामोश हैं या फिर “सिस्टम” का हिस्सा बन चुके हैं।
सबसे बड़ा सवाल:
क्या सिंगरौली में कानून सिर्फ गरीब और आम जनता के लिए है?
और क्या नेताओं के लिए नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
अगर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचना तय है।







