Breaking News:  कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से थोक महंगाई काबू से बाहर, अप्रैल में महंगाई साढ़े तीन साल के सबसे ऊंचे लेवल 8.3 परसेंट पर पहुंची, आम जनता की मुश्किलें बढ़ीं

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Friday, May 15, 2026 8:51 AM

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Breaking News:  कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से थोक महंगाई काबू से बाहर, अप्रैल में महंगाई साढ़े तीन साल के सबसे ऊंचे लेवल 8.3 परसेंट पर पहुंची, आम जनता की मुश्किलें बढ़ीं

Breaking News:  महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी (Common man on the inflation front) के लिए एक बार फिर बुरी खबर सामने (Bad news surfaces.) आई है। होलसेल प्राइस इंडेक्स (Wholesale Price Index) (WPI) पर आधारित महंगाई दर (Inflation Rate) अप्रैल में तेजी से बढ़कर 8.30 परसेंट हो गई, जो पिछले महीने मार्च में सिर्फ 3.88 परसेंट थी। कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री की तरफ से जारी आंकड़ों (Statistics released by the Ministry of Industry) के मुताबिक, होलसेल महंगाई में तेज बढ़ोतरी ग्लोबल अस्थिरता (Sharp Rise in Wholesale Inflation; Global Instability)  और सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह (Reasons for disruptions in the supply chain) से हुई। अक्टूबर 2022 के बाद यह पहली बार है जब होलसेल महंगाई आठ परसेंट के आंकड़े को पार (Wholesale inflation crosses 8% mark)  कर गई है।

 

 

 

 

 

होलसेल महंगाई में बढ़ोतरी की मुख्य वजह मिनरल ऑयल (Mineral oil is the primary reason for the rise in wholesale inflation.) , कच्चे पेट्रोलियम (Crude Petroleum) और नेचुरल गैस की कीमतों (Natural gas prices) में जबरदस्त उछाल है। आंकड़ों के मुताबिक (According to statistics) , कच्चे पेट्रोलियम की होलसेल महंगाई दर (Wholesale Inflation Rate for Petroleum) में साल-दर-साल आधार पर 88.06 परसेंट की बढ़ोतरी हुई, जबकि फ्यूल और पावर सेगमेंट (Power Segment) में यह दर 24.71 परसेंट रही। वहीं, LPG की कीमतों में भी 10.92 परसेंट की बढ़ोतरी हुई। मिनिस्ट्री ने साफ (The Ministry clarified) किया कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई-डिमांड के गैप ने फ्यूल की कीमतों (The supply-demand gap in the global energy market has pushed up fuel prices.) पर असर डाला है, जिसका सीधा असर होलसेल मार्केट पर पड़ा (It had a direct impact on the wholesale market.) है।

 

 

 

 

फ्यूल (Fuel) और एनर्जी सेक्टर में उथल-पुथल (Turmoil in the Energy Sector) के बीच राहत की बात यह है कि फूड इन्फ्लेशन में कमी जारी (Decline in Food Inflation Continues)  है। अप्रैल में होलसेल फूड इन्फ्लेशन 2.31 परसेंट रही, जो दूसरे सेक्टर्स के मुकाबले काफी कम (Significantly lower compared to other sectors) है। हालांकि, रिटेल इन्फ्लेशन के आंकड़ों में थोड़ी बढ़ोतरी (Slight rise in retail inflation figures.) देखी गई है, जिसमें तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य इन्फ्लेशन चार्ट में टॉप पर हैं। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि अगर जियोपॉलिटिकल रिस्क कम नहीं (Geopolitical risks are not insignificant.) हुए, तो आने वाले समय में मैन्युफैक्चर्ड गुड्स (Just-in-time manufactured goods) और दूसरी सर्विसेज की कॉस्ट (Cost of Services) और बढ़ सकती है।

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