Petrol and Diesel Prices: देश भर में पेट्रोल और डीज़ल आखिरकार महंगा हो गया, कीमतें 3-3 रुपये प्रति लीटर बढ़ीं, पेट्रोल 97.77 रुपये प्रति लीटर हुआ
Petrol and Diesel Prices: लंबे समय से चल रहे कयासों (Speculations) और आशंकाओं पर विराम लगाते (Putting an end to apprehensions) हुए, सरकारी तेल कंपनियों ने आखिरकार पेट्रोल (Government oil companies finally started selling petrol) और डीज़ल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी (Major Hike in Diesel Prices) की है। शुक्रवार सुबह जारी नए रेट्स के अनुसार, देश भर में पेट्रोल (Petrol Across the Country) और डीज़ल की कीमतों (Diesel prices) में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी गैस की कीमतों में बढ़ोतरी (Increase in Gas Prices) के बाद हुई है, जिससे आम जनता पर महंगाई (The Impact of Inflation on the Common Man) का एक और बोझ पड़ गया है।
दरअसल, पेट्रोल और डीज़ल की रिटेल कीमतों (Retail prices of diesel) में यह बदलाव लगभग चार साल के लंबे गैप के बाद देखा गया है। इससे पहले, खुद केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री (The Union Petroleum Minister himself) हरदीप सिंह पुरी ने तेल की कीमतें बढ़ाने का साफ संकेत (A clear indication of a hike in oil prices.) दिया था। उनके बयान के बाद से ही कयास (Speculations since the statement) लगाए जा रहे थे कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें कभी भी बढ़ सकती (Diesel prices could rise at any moment.) हैं, और अब यह डर हकीकत में बदल गया (The fear turned into reality.) है।
देश भर में एक जैसी बढ़ोतरी
इस बीच, शुक्रवार सुबह सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी रिटेल कीमतों (Retail prices released by state-run oil companies) में पूरे देश में एक जैसी बढ़ोतरी देखी (A uniform growth was observed across the country.) गई। नए रेट (New Rates) शुक्रवार रात से ही लागू हो गए। डेटा के मुताबिक, पेट्रोल ₹3.14 प्रति लीटर बढ़कर ₹97.77 हो गया, जबकि डीज़ल ₹3.11 प्रति लीटर बढ़कर ₹90.67 पर बिका।
कीमतें क्यों बढ़ाईं?
पेट्रोलियम कंपनियों ने इस बढ़ोतरी (Petroleum companies [implemented] this hike.) के लिए इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों (Rising crude oil prices in the international market) और इससे हो रहे भारी नुकसान को वजह (The cause of heavy losses) बताया है। कंपनियों ने दावा किया कि महंगे कच्चे तेल की वजह से उन्हें रोज़ाना (Due to expensive crude oil, they have to pay daily) करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। पेट्रोलियम मिनिस्टर (Petroleum Minister) ने इस बात पर भी ज़ोर दिया था कि अगर तेल की रिटेल कीमतें नहीं बढ़ाई (Retail oil prices have not been raised.) गईं, तो तेल कंपनियों का नुकसान (Losses of Oil Companies) एक तिमाही में 1 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा हो सकता है। हालांकि, मौजूदा बढ़ोतरी के बावजूद, यह बढ़ोतरी अभी भी कंपनियों द्वारा बताए गए नुकसान की तुलना (The increase is still comparable to the losses reported by the companies.) में कम है।







