भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट $4 बिलियन के पार, US और इज़राइल जैसे बड़े देश ब्रह्मोस और पिनाका के फैन हुए, ‘मेक इन इंडिया’ ने दुनिया भर में सफलता के झंडे गाड़े
भारत ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में डिफेंस एक्सपोर्ट (Defense Exports in the Financial Year) का $4 बिलियन (लगभग ₹33,000 करोड़ से ज़्यादा) का आंकड़ा पार कर (Surpassing the figure) लिया है, जिससे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के फील्ड (The Field of Defense Manufacturing) में एक बड़ी कामयाबी (A Major Success) मिली है। मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (Ministry of Defence) के मुताबिक, यह पिछले साल के मुकाबले 60 परसेंट से ज़्यादा की बड़ी बढ़ोतरी (Significant Increase) है। डिफेंस मिनिस्टर (Defense Minister) राजनाथ सिंह ने इस कामयाबी को इंडियन डिफेंस इंडस्ट्री की बढ़ती ताकत (The Growing Strength of the Indian Defense Industry) और ‘आत्मनिर्भर भारत’ कैंपेन की जीत (Campaign Victory) बताया। अभी, भारत का डिफेंस इकोसिस्टम (India’s Defense Ecosystem) इतना मजबूत हो गया है कि सरकारी कंपनियों के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर (The private sector, alongside government companies) भी इस एक्सपोर्ट में 45 परसेंट का अहम हिस्सा दे रहे हैं, जिससे भारत अब दुनिया (India is now the world…) के टॉप 25 डिफेंस एक्सपोर्टर्स की लिस्ट (List of Top 25 Defense Exporters) में मजबूती से शामिल (Firmly integrated) हो गया है।
भारत की मिलिट्री पावर (India’s Military Power) का लोहा अब फिलीपींस (Iron is now in the Philippines.) से लेकर आर्मेनिया (Armenia) तक मानते हैं। फिलीपींस ने चीन की चुनौतियों का मुकाबला (The Philippines Counters China’s Challenges) करने के लिए भारत के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें डील (BrahMos Supersonic Cruise Missile Deal with India) करके डिफेंस हिस्ट्री (Defense History) में एक नया चैप्टर जोड़ा (Added a new chapter.) है। इस बीच, आर्मेनिया भारत से पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (Armenia Acquires Pinaka Multi-Barrel Rocket Launchers from India) और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम (Akash Air Defence System) जैसे खतरनाक हथियार खरीद (Purchase of Dangerous Weapons) रहा है। हैरानी की बात नहीं है कि US, फ्रांस और इज़राइल जैसे मिलिट्री के मामले (Military matters like those of Israel) में मजबूत देश भी भारत से बुलेटप्रूफ जैकेट (Other countries, too, are sourcing bulletproof jackets from India.) , रडार सिस्टम, एयरोस्पेस कंपोनेंट (Aerospace Components) और इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट इंपोर्ट (Import of Electronic Equipment) कर रहे हैं। भारत अब 100 से ज़्यादा देशों को अपनी डिफेंस टेक्नोलॉजी (Countries need their own defense technology.) और इक्विपमेंट सप्लाई (Equipment Supply) कर रहा है, जो भारत की टेक्नोलॉजिकल सुपीरियरिटी (India’s Technological Superiority) का सबूत है।
प्रधानमंत्री (Prime Minister) नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पॉलिसी ने भारत को सिर्फ एक खरीदार (India—merely a buyer) से एक भरोसेमंद ग्लोबल सप्लायर (Reliable Global Supplier) बना दिया है। ऑस्ट्रेलिया, UAE, सऊदी अरब और जर्मनी जैसे देश अब भारतीय डिफेंस प्रोडक्ट्स पर भरोसा (The country now places its trust in Indian defense products.) कर रहे हैं। यह अचीवमेंट न सिर्फ भारत की इकॉनमी को मजबूत कर रही है, बल्कि डिप्लोमैटिक लेवल पर ग्लोबल स्टेज पर भारत की पोजीशन को और असरदार भी बना रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर एक्सपोर्ट की यह रफ़्तार बनी रही, तो भारत अगले कुछ सालों में ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का एक बड़ा हब बनकर उभरेगा, जिससे फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व (Foreign Exchange Reserves) में बढ़ोतरी होगी और लाखों नई नौकरियाँ भी पैदा होंगी।







